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कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने किया स्पष्ट
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दुर्लभ और बहुमूल्य आभूषणों की 3डी मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का काम भी जारी
भुवनेश्वर। पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं की चल रही सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
मीडियाकर्मियों से बातचीत में हरिचंदन ने रत्न भंडार की चल रही इन्वेंटरी के साथ-साथ श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और पुरी के स्थानीय निवासियों के लिए प्रस्तावित विशेष दर्शन व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी।
कानून मंत्री ने कहा कि रत्न भंडार में रखी बहुमूल्य वस्तुओं की गिनती और लेखा-जोखा का काम मार्गशीर्ष महीने के अंत तक पूरा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया वर्ष 1978 में तैयार की गई सूची के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सूची के आधार पर पूरी इन्वेंटरी तैयार होने के बाद एक नई सूची बनाई जाएगी। हालांकि, रत्न भंडार की अंतिम सूची अथवा इन्वेंटरी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
हरिचंदन ने बताया कि दुर्लभ और बहुमूल्य आभूषणों की 3डी मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का काम भी जारी है। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा के बाद भी यह प्रक्रिया कुछ समय तक जारी रहेगी और इसके मार्गशीर्ष महीने के अंत से पहले पूरा होने की उम्मीद है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नई इन्वेंटरी से रत्न भंडार में मौजूद बहुमूल्य वस्तुओं का अद्यतन रिकॉर्ड तैयार होगा, लेकिन कीमती आभूषणों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के सुगम और व्यवस्थित दर्शन के संबंध में कानून मंत्री ने कहा कि अगले तीन से चार महीनों के भीतर नाटमंडप में रैंप आधारित कतार व्यवस्था लागू करने की योजना है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही और कतार प्रबंधन को बेहतर बनाते हुए दर्शन को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।
रैंप प्रणाली का डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी भुवनेश्वर को सौंपी गई है। प्रस्ताव की सरकारी स्तर पर समीक्षा की जा चुकी है। इसके बाद छत्तीसा नियोग के पदाधिकारियों और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के सदस्यों के साथ आगे विचार-विमर्श के बाद इसे लागू किया जाएगा।
कानून मंत्री ने यह भी बताया कि पुरी के स्थानीय निवासियों के लिए मंदिर के उत्तरद्वार (नॉर्थ गेट) से विशेष दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य पुरी के स्थानीय निवासियों को दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराना और मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करना है।
रत्न भंडार की इन्वेंटरी तैयार करने की प्रक्रिया और दर्शन व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए जा रहे ये कदम श्रीमंदिर के प्रबंधन को बेहतर बनाने तथा श्रद्धालुओं के दर्शन अनुभव को सुगम करने के राज्य सरकार के प्रयासों का हिस्सा हैं।
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