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किसानों को मिलेगा बाजार और ब्रांड का सीधा लाभ
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29 देशी धान किस्मों का हुआ मूल्यांकन
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कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले चावल और विशेष ब्लैक राइस पर जोर
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सब्जी नहीं, बल्कि धान-मिलेट से बनेंगे फ्लेक्स, कुकीज और बेक्ड उत्पाद
भुवनेश्वर। ओडिशा के किसानों की पारंपरिक धान और मोटे अनाज की किस्मों को अब स्थानीय बाजार से निकालकर देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की भागीदारी से अत्याधुनिक राइस एवं मिलेट फैक्ट्री स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य केवल अनाज की प्रोसेसिंग करना नहीं, बल्कि ओडिशा की देशी कृषि उपज को मजबूत ब्रांड में बदलकर उसका आर्थिक लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना है।
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले चावल पर विशेष जोर
कृषि एवं किसान सशक्तीकरण तथा ऊर्जा मंत्री और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, महिला एवं बाल विकास, मिशन शक्ति एवं पर्यटन विभाग की उपमुख्यमंत्री, फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ नेसे श्रीनिवासुलु, कृषि विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव, मिशन शक्ति की वरिष्ठ अधिकारी मानसी निंभाल सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद परियोजना की रूपरेखा सामने आई है।
प्रस्तावित फैक्ट्री के लिए 3,845 वर्ग मीटर क्षेत्र स्वीकृत है। इसे किसान आधारित, एफपीओ और एसएचजी के स्वामित्व वाली तथा निजी क्षेत्र और संस्थागत सहयोग से संचालित परियोजना के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पक्ष किसानों की सीधी भागीदारी होगी। बेहतर उत्पादन देने वाली पारंपरिक धान किस्मों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज अपनाने और सीधे बाजार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
29 देशी किस्मों की गुणवत्ता परखी गई
परियोजना के तहत ओडिशा की 29 देशी धान किस्मों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया है। इनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स, प्रोटीन की मात्रा, मिलिंग क्षमता, सुगंध और पकने के बाद बनावट जैसे महत्वपूर्ण गुणों का अध्ययन किया गया। खासतौर पर कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और उच्च पोषण मूल्य वाली किस्मों को बाजार की विशेष मांग के अनुरूप विकसित करने की योजना है।
फैक्ट्री में एक विशेष रॉ राइस यूनिट स्थापित होगी
प्रस्तावित फैक्ट्री में एक विशेष रॉ राइस यूनिट स्थापित की जाएगी, जहां कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली तथा कालाजीरा जैसी विशिष्ट धान किस्मों पर काम होगा। इसके साथ ही स्पेशलिटी ब्लैक राइस को भी अलग पहचान देने की तैयारी है, जिसका लक्ष्य घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार में ओडिशा की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
चावल और मिलेट से बनेंगे मूल्यवर्धित उत्पाद
परियोजना केवल कच्चे अनाज की मिलिंग तक सीमित नहीं रहेगी। फैक्ट्री में मल्टी-मिलेट फ्लेक्स, मोटे आईआरआरआई-147 चावल के फ्लेक्स, जीरा कुकीज और विभिन्न बेक्ड उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इन उत्पादों को खुदरा बाजार में उतारने के साथ-साथ राज्य के बाहर और विदेशों में भी भेजने की योजना है।
इन उत्पादों की बिक्री सुभद्रा शक्ति बाजारों के माध्यम से भी करने का प्रस्ताव है। इससे मिशन शक्ति से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को बाजार और आय के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
किसान होंगे पूरी परियोजना की रीढ़
इस पहल में आधुनिक औद्योगिक ढांचे को सामुदायिक स्वामित्व के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है। किसानों को केवल कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि पूरी मूल्य श्रृंखला के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में शामिल करने का लक्ष्य है। प्रशिक्षण, बीज चयन, गुणवत्ता परीक्षण, प्रसंस्करण और बाजार से सीधा जुड़ाव इस मॉडल के प्रमुख आधार होंगे।
सरकार की मंशा है कि ओडिशा की पारंपरिक धान और मिलेट किस्मों को आधुनिक पैकेजिंग, प्रसंस्करण और विपणन के जरिए ‘लोकल से ग्लोबल’ पहचान दी जाए। यदि योजना निर्धारित स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो राइस एवं मिलेट फैक्ट्री किसानों की आय बढ़ाने के साथ ओडिशा के देशी अनाजों के लिए एक मजबूत वैश्विक ब्रांड तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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