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डिजिटल होगी जमीन की पूरी व्यवस्था

  •     डीआईएलआरएमपी 3.0 में लैंड स्टाक से जुड़ेगा हर भूखंड

  •     केंद्र ने जारी की नई परिचालन गाइडलाइन

  •     2031 तक चलेगा कार्यक्रम

  •     ओडिशा में 1.99 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड कंप्यूटरीकृत

  •     311 तहसीलों में आधुनिक रिकॉर्ड रूम

भुवनेश्वर। देश में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नक्शे, पंजीकरण और राजस्व सेवाओं को एक ही डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) 3.0 की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डीआईएलआरएमपी 3.0 की परिचालन गाइडलाइन जारी की। नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग जगहों पर मौजूद भूमि संबंधी सूचनाओं को एक एकीकृत, पारस्परिक रूप से जुड़ी और जीआईएस आधारित लैंड स्टाक में लाया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने, विवादों और नामांतरण में देरी कम करने तथा नागरिकों को जमीन से जुड़ी सेवाएं तेजी से उपलब्ध कराना है। ओडिशा ने भी इस दिशा में लगभग शत-प्रतिशत प्रगति दर्ज करते हुए डिजिटल भूमि प्रशासन की मजबूत नींव तैयार कर ली है।

हर भूखंड को मिलेगा डिजिटल पहचान नंबर

डीआईएलआरएमपी 3.0 को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू किया जाएगा। इसके लिए कुल 565.50 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम के तहत भूखंडों से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को एकीकृत डिजिटल ढांचे में लाने की योजना है।

लैंड स्टाक में कडस्ट्रल नक्शे आधारभूत स्थानिक परत के रूप में काम करेंगे। इसके साथ रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर), पंजीकरण संबंधी जानकारी, सर्किल रेट, भूमि पर लागू प्रतिबंध, भूमि उपयोग, भवन योजनाएं और अन्य संबंधित सूचनाओं को पारस्परिक रूप से जुड़े एपीआई के माध्यम से एकीकृत किया जाएगा।

हर भूखंड की विशिष्ट पहचान के लिए यूएलपीआईएन /भू-आधार को साझा और विशिष्ट पहचान संख्या के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे किसी जमीन की पहचान और उससे जुड़े रिकॉर्ड को अलग-अलग प्रणालियों में आसानी से जोड़ा और सत्यापित किया जा सकेगा।

जमीन के पुराने रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल

डीआईएलआरएमपी 3.0 के तहत ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी क्षेत्रों के सभी भूखंडों के डिजिटलीकरण, नक्शों के जियो-रेफरेंसिंग और भू-आधार आवंटन पर जोर दिया गया है। पुराने भूमि और पंजीकरण रिकॉर्ड को भी डिजिटल रूप में लाकर उनकी खोज और पहुंच आसान बनाने की योजना है।

नागरिकों को सुरक्षित पहचान सत्यापन और उनकी सहमति आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रमाणित एवं सुरक्षित भूमि सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पंजीकरण प्रणाली को भी आधुनिक और एकीकृत किया जाएगा, जिससे संपत्ति लेन-देन को शुरू से अंत तक डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।

राजस्व न्यायालयों की प्रक्रियाओं को भी मजबूत और डिजिटल किया जाएगा। इससे नामांतरण और भूमि विवादों के निपटारे में होने वाली देरी कम करने तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है।

ओडिशा में 1.99 करोड़ से ज्यादा आरओआर कंप्यूटरीकृत

नई पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि डीआईएलआरएमपी 3.0 भूमि प्रशासन को एकीकृत, डिजिटल, जीआईएस आधारित और नागरिक-केंद्रित व्यवस्था में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। इससे पारदर्शिता, सुरक्षा, सुविधा और जमीन से जुड़ी सेवाओं की त्वरित उपलब्धता मजबूत होगी।

उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार पहले से ही राजस्व प्रशासन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। राज्य की 317 तहसीलों में से 311 में आधुनिक रिकॉर्ड रूम स्थापित किए जा चुके हैं।

राज्य में अब तक 1,99,86,487 रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) कंप्यूटरीकृत किए जा चुके हैं। वहीं करीब 51,802 गांवों में से 51,742 गांवों के कडस्ट्रल नक्शे यानी भू-नक्शे तैयार किए जा चुके हैं।

छह जिलों में हाईटेक सर्वे, पंजीकरण कार्यालय भी होंगे आधुनिक

ओडिशा के झारसुगुड़ा, जगतसिंहपुर, जाजपुर, केंदुझर, कलाहांडी और गंजाम जिलों में हाईटेक भूमि सर्वे का काम चल रहा है। इसके साथ पंजीकरण व्यवस्था को भी तकनीक से मजबूत किया जा रहा है।

राज्य के कुल 321 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में से 213 कार्यालय कंप्यूटरीकृत किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में स्थापित किए गए 108 नए पंजीकरण कार्यालयों को भी जल्द आधुनिक तकनीकी ढांचे से लैस किया जा रहा है।

राजस्व अधिकारियों को भी डिजिटल प्रशिक्षण

तकनीकी बदलाव के साथ राजस्व विभाग के मैदानी अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए गोठपाटना स्थित रेवेन्यू ऑफिसर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरओटीआई) में डीआईएलआरएमपी सेल स्थापित किया गया है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग नकदरहित और कागजरहित पंजीकरण व्यवस्था, उन्नत निगरानी तकनीक तथा अन्य तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ओडिशा की मौजूदा डिजिटल उपलब्धियों को डीआईएलआरएमपी 3.0 के नए एकीकृत ढांचे से जोड़ने पर जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे, पंजीकरण और राजस्व सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। इससे आम नागरिकों को जमीन से जुड़े काम के लिए अलग-अलग कार्यालयों और प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

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