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2027 चुनाव को लेकर तैयारियां हुईं तेज
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7 नवंबर तक चलेगा डोर-टू-डोर सर्वे
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1 जनवरी 2027 को प्रारूप मतदाता सूची
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10 फरवरी को जारी होगी अंतिम सूची
भुवनेश्वर। ओडिशा में वर्ष 2027 में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के आम चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने के लिए 26 अक्टूबर 2026 से घर-घर मतदाता सर्वेक्षण शुरू करने का फैसला किया है। यह अभियान 7 नवंबर तक चलेगा। इसके जरिए नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के साथ मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करने और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं समावेशी बनाने पर जोर दिया जाएगा।
1 जनवरी 2027 होगी कटऑफ तारीख
आवास एवं शहरी विकास विभाग की अधिसूचना के अनुसार नए मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए 1 जनवरी 2027 को कटऑफ तारीख निर्धारित की गई है। इसी दिन प्रारूप मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद प्रक्रिया पूरी करते हुए 10 फरवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची को व्यापक स्तर पर जांचकर अद्यतन करना है, ताकि पात्र मतदाताओं का नाम छूटे नहीं और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को समय रहते ठीक किया जा सके।
23 सितंबर को मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण
सर्वेक्षण अभियान को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए 23 सितंबर को भुवनेश्वर स्थित स्टेट कन्वेंशन सेंटर में राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें मास्टर ट्रेनरों को सर्वेक्षण की प्रक्रिया और उससे जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाएगी।
आवास एवं शहरी विकास विभाग के अवर सचिव जे. दुर्ज्योधन पात्रो ने नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगरपालिकाओं और नगर क्षेत्र परिषदों (एनएसी) के कार्यपालक अधिकारियों को पत्र भेजकर सर्वेक्षण टीमों को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अभियान को समय पर पूरा कराने को कहा गया है।
सटीक मतदाता सूची पर रहेगा जोर
घर-घर सर्वे के माध्यम से मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से नए पात्र मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने और मतदाता सूची में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।
राज्य सरकार की यह कवायद 2027 के पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, समावेशिता और मतदाताओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
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