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ओडिशा में हाई रिस्क गर्भावस्था के लिए नई रेफरल व्यवस्था

  •     एंबुलेंस से अस्पताल तक तय होगी पूरी श्रृंखला

  •     एनएचएम ने जारी किया नया एसओपी

  •     खतरे के संकेत मिलते ही तुरंत भेजी जाएगी 108 एंबुलेंस

  •     रेफरल अस्पताल को पहले ही मिलेगा एसएमएस अलर्ट

भुवनेश्वर। ओडिशा में गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद गंभीर जोखिम वाली माताओं को समय पर आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), ओडिशा ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) और हाई रिस्क पोस्टनैटल (एचआरपीएनसी) मामलों के रेफरल एवं परिवहन के लिए नया मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू किया है। नई व्यवस्था में हाई रिस्क मामले की पहचान से लेकर मरीज को निर्धारित रेफरल अस्पताल में उपचार मिलने तक पूरी प्रक्रिया को एकीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में देरी कम करना और मां तथा नवजात की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

रेड कार्ड या खतरे के संकेत मिलते ही सक्रिय होगी एंबुलेंस व्यवस्था

नए एसओपी के तहत हाई रिस्क गर्भावस्था की पुष्टि होने या प्रसूता में गंभीर खतरे के संकेत दिखाई देने पर तुरंत 108 एंबुलेंस भेजी जाएगी। साथ ही संबंधित रेफरल केंद्र के नोडल अधिकारी को एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाएगी। इससे मरीज के पहुंचने से पहले ही संबंधित अस्पताल को मामले की गंभीरता की जानकारी मिल जाएगी और आवश्यक उपचार की तैयारी की जा सकेगी।

प्रत्येक ब्लॉक निर्धारित फर्स्ट रेफरल यूनिट से जुड़ेगा

एसओपी के तहत राज्य के प्रत्येक ब्लॉक को एक निर्धारित फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) से जोड़ा गया है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को यह स्पष्ट रहेगा कि हाई रिस्क मामले को किस स्वास्थ्य संस्थान में भेजना है और रेफरल प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी।

रेफरल से लेकर मरीज के हस्तांतरण तक डिजिटल निगरानी

हाई रिस्क गर्भवती महिला को रेफरल के दौरान हस्ताक्षरित रेफरल स्लिप के साथ भेजा जाएगा। स्वास्थ्य केंद्र पर मरीज के हस्तांतरण की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। इसमें तस्वीर और संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी शामिल होंगे।

इस व्यवस्था से मरीज के एक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। साथ ही जिम्मेदारी तय करने और उपचार की निरंतरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

एंबुलेंस कर्मियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

नए एसओपी का अनावरण भुवनेश्वर स्थित 108 एंबुलेंस सेवा कार्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण में मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों की समय पर पहचान और त्वरित रेफरल के महत्व पर जोर दिया गया।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी यह निगरानी करेंगे कि सभी ब्लॉक निर्धारित एफआरयू से सही तरीके से जुड़े हैं या नहीं। इसके साथ ही रेफरल के मामलों और उनके रुझानों की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि व्यवस्था में मौजूद कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।

ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज राज्यभर के एंबुलेंस कर्मचारियों और मैदानी टीमों तक नए एसओपी को पहुंचाएगा और उन्हें इसकी प्रक्रिया के अनुसार प्रशिक्षित करेगा। नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से हाई रिस्क गर्भावस्था और प्रसवोत्तर जटिलताओं के मामलों में ‘पहचान से उपचार तक’ तेज, व्यवस्थित और जवाबदेह रेफरल तंत्र विकसित होने की उम्मीद है।

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