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जीनोमिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान पर विशेषज्ञों का जोर
बालेश्वर। फकीर मोहन विश्वविद्यालय में समुद्री जैव-संसाधनों की खोज में जैव-सूचना विज्ञान के उपयोग पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय व्यावहारिक कार्यशाला शुरू हुई।
ओएमबीआरआईसी परियोजना के तहत आयोजित कार्यशाला में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला 4 सितंबर तक चलेगी।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो संतोष कुमार त्रिपाठी ने समुद्री जैव-सूचना विज्ञान को 21वीं सदी का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि ओडिशा का समृद्ध तटीय पारिस्थितिकी तंत्र अनुसंधान और नवाचार की अपार संभावनाएं रखता है।
ओएमबीआरआईसी परियोजना के समन्वयक प्रो पीसी मिश्र ने समुद्री जैव-विविधता में अनुसंधान की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। परियोजना के मार्गदर्शक प्रो बीपी दास ने जीनोमिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आंकड़ा आधारित अनुसंधान के समन्वय को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
स्नातकोत्तर परिषद के अध्यक्ष प्रो संतोष कुमार अग्रवाल ने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से शिक्षकों और विद्यार्थियों को विशेषज्ञों एवं आधुनिक तकनीकों के साथ सीखने का अवसर मिलता है।
मुख्य वक्ता डॉ अनुभव खान ने समुद्री पारिस्थितिकी, जैव-विविधता संरक्षण और औषधीय उपयोग वाले नए जैव-सक्रिय यौगिकों की खोज में जीनोमिक्स एवं संगणकीय जीव विज्ञान की भूमिका पर जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ बी बी पटनायक के स्वागत भाषण से हुई।
डॉ मनोजित भट्टाचार्य ने अतिथियों का परिचय कराया और डॉ शुभ्रकांत जेना ने धन्यवाद ज्ञापन किया। बाद में गोवा स्थित राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के डॉ अनिल चटर्जी तथा केरल विश्वविद्यालय की डॉ अनिता एम जॉर्ज ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। कार्यशाला के तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को आधुनिक जैव-सूचना विज्ञान उपकरणों और समुद्री जीनोमिक्स तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
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