बालेश्वर – फकीर मोहन विश्वविद्यालय (एफएमयू) में ‘इंट्रोडक्शन टू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : कॉन्सेप्ट, एप्लीकेशंस एंड एथिक्स’ विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ 10 अगस्त को हुआ। विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर कंप्यूटर साइंस विभाग एवं मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 10 से 14 अगस्त तक चलेगा।
यह एफडीपी ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की पहल के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को वैल्यू एडेड कोर्स के रूप में शामिल करने की दिशा में शिक्षकों की क्षमता का विकास करना है। इसके माध्यम से शिक्षकों को अध्यापन, सीखने, शोध एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के 70 से अधिक शिक्षक भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में एफएमयू के एचआरडीसी निदेशक प्रो. रवींद्र कुमार नायक, हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रो. एस.के. उद्गता बतौर विशिष्ट अतिथि तथा एफएमयू के पीजी काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार अग्रवाल ने उपस्थित होकर अपने विचार रखे।
एचआरडीसी के सदस्य एवं कार्यक्रम समन्वयक अरुण कुमार नायक ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। पीजी कंप्यूटर साइंस विभाग की एफडीपी समन्वयक डॉ. मिनाती मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि सह-समन्वयक डॉ. मानसिनी प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
एफडीपी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं इंटेलिजेंट सिस्टम, मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क, डीप लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी), कंप्यूटर विजन सहित एआई के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कला, विज्ञान एवं वाणिज्य विषयों में एआई के विभिन्न उपकरणों और अनुप्रयोगों की जानकारी के साथ समकालीन एआई प्लेटफॉर्म पर प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कार्यक्रम में एथिकल एवं रिस्पॉन्सिबल एआई पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें डीपफेक, एआई-जनित सामग्री, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा डेटा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केस स्टडी, समूह गतिविधियों, क्विज और मिनी प्रोजेक्ट के माध्यम से समझाया जाएगा।
यह एफडीपी एफएमयू की एनईपी-2020 के अनुरूप तकनीक आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक के दौर में शिक्षकों को भविष्य की शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए तैयार करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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