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जंगल से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
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आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की सूचना पर डीवीएफ का अभियान
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क्लेमोर माइन और आईईडी समेत कई घातक सामग्री जब्त
कोरापुट। कोरापुट जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। बेइपारीगुड़ा थाना क्षेत्र के बदलीपहाड़ जंगल में स्थित माओवादियों के एक गुप्त ठिकाने से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर जिला स्वैच्छिक बल (डीवीएफ) ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की सीमा से लगे जंगल क्षेत्र में विशेष तलाशी अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटकों के बड़े जखीरे का पता लगाया।
हथियार और बम बरामद
सुरक्षा बलों ने एक इंसास राइफल, एक देशी बंदूक, लगभग 18 किलोग्राम वजन की छह क्लेमोर माइन, 10 किलोग्राम और 4 किलोग्राम वजन वाले कई टिफिन बम आईईडी, माओवादी किट बैग, माओवादी साहित्य, दवाइयां तथा खाद्य सामग्री बरामद की है।
अधिकारियों का मानना है कि यह जखीरा आंध्र-ओडिशा सीमा विशेष जोनल समिति (एओबीएसजेडसी) के माओवादी कैडरों का था। आशंका है कि इन हथियारों और विस्फोटकों का उपयोग सुरक्षा बलों तथा आम नागरिकों पर हमले करने के लिए किया जाना था।
नक्सलमुक्त कोरापुट अभियान को मिली मजबूती
सुरक्षा बलों की यह सफलता कोरापुट जिले को 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बनाने के घोषित लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच जिले में एक नक्सली कैडर को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है।
लगातार जारी है कॉम्बिंग ऑपरेशन
क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों की किसी भी संभावित पुनरावृत्ति को रोकने के लिए विशेष अभियान समूह (एसओजी), जिला स्वैच्छिक बल (डीवीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा लगातार कॉम्बिंग एवं तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने इस बरामदगी को क्षेत्र में माओवादियों की योजनाओं के लिए बड़ा झटका बताया है। उनका कहना है कि यह अभियान विद्रोह और उग्रवाद से निपटने में खुफिया सूचनाओं तथा जमीनी स्तर पर समन्वित कार्रवाई की प्रभावशीलता को दर्शाता है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस सफलता से क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी।
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