Home / Odisha / ओडिशा के 64 स्थानों की सही वर्तनी को कैबिनेट की मंजूरी

ओडिशा के 64 स्थानों की सही वर्तनी को कैबिनेट की मंजूरी

  •     औपनिवेशिक विरासत से मिलेगी मुक्ति

  •     ओड़िया अस्मिता को सशक्त करने की पहल

  •     दशकों पुरानी भाषाई विकृतियों को किया जाएगा दूर

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 26 जिलों के 64 स्थानों की अंग्रेजी वर्तनी (स्पेलिंग) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर की गई इस पहल का उद्देश्य औपनिवेशिक काल में प्रचलित हुई गलत वर्तनियों को हटाकर मूल ओड़िया उच्चारण और नामों को आधिकारिक मान्यता देना है।

कैबिनेट के इस फैसले के तहत उन अंग्रेजी नामों को बदला जाएगा जो वर्षों से स्थानीय उच्चारण और वास्तविक ओड़िया स्वरूप से मेल नहीं खाते थे।

उदाहरण के तौर पर “Aul” की जगह “Aali”, “Balasore” की जगह “Baleshwar”, “Cuttack” की जगह “Kataka”, “Keonjhar” की जगह “Kendujhar” और “Angul” की जगह “Anugola” जैसे नामों को अपनाया जाएगा।

सरकार के अनुसार यह केवल वर्तनी बदलने का प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि ओड़िया भाषा, संस्कृति और ‘ओड़िया अस्मिता’ को सम्मान देने का प्रयास है। लंबे समय से इन औपनिवेशिक विकृतियों के कारण स्थानीय पहचान प्रभावित होती रही थी।

इस प्रक्रिया के लिए सभी जिलाधिकारियों से ऐसे स्थानों की सूची और विस्तृत रिपोर्ट मंगाई गई थी। जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी सुझाव लिए गए। प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रतिभा राय की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने सभी प्रस्तावों की समीक्षा की और अपनी अनुशंसाओं को एक महीने तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध कराया। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम सूची तैयार की गई।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य सरकार अब इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। साथ ही भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारतीय रेलवे, डाक विभाग, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त सहित अन्य संबंधित केंद्रीय एजेंसियों से भी अपने आधिकारिक अभिलेखों में नई वर्तनी को अपनाने का अनुरोध किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि जब लोगों के शहरों और गांवों के नाम उनकी वास्तविक भाषा और उच्चारण के अनुरूप आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज होंगे, तो यह केवल एक भाषाई सुधार नहीं बल्कि सांस्कृतिक गौरव और आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना का प्रतीक होगा।

ओडिशा विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपनी समृद्ध परंपराओं और भाषाई विरासत को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। 64 स्थानों की सही वर्तनी को मंजूरी देने का यह निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।

Share this news

About desk

Check Also

सुभद्रा योजना के दो साल पूरे

    ओडिशा में घर-घर जलेगा ‘सुभद्रा दीप’     उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा की अपील …