-
कहा-जगन्नाथ धाम सर्वश्रेष्ठ साधना स्थली
-
आध्यात्मिकता को धर्म की सीमाओं से आगे बढ़कर देखने और समझने की आवश्यकता
भुवनेश्वर। आध्यात्मिकता को धर्म की सीमाओं से आगे बढ़ाकर “आध्यात्मिक साइंस” यानी आध्यात्मिक विज्ञान के रूप में देखने और समझने की आवश्यकता है।
उक्त बातें विशेष बातचीत के दौरान योगी प्रियव्रत अनिमेष ने कहीं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह चेतना, ऊर्जा, मन और प्रकृति के बीच संबंधों को समझने वाला एक वैज्ञानिक विषय भी है। “आध्यात्मिक योग” व्यक्ति को शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा प्रदान करता है तथा मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा का जगन्नाथ धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र है। सदियों से साधकों, संतों और आध्यात्मिक शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र को विशेष चेतनात्मक और आध्यात्मिक प्रभाव वाला क्षेत्र माना है।
योगी प्रियव्रत अनिमेष के अनुसार विश्व में कुछ ऐसे स्थानों का उल्लेख मिलता है जिन्हें विशेष आध्यात्मिक एवं चुंबकीय ऊर्जा केंद्रों के रूप में देखा जाता है, और जगन्नाथ धाम ऐसी ही दिव्य ऊर्जा और चेतना से परिपूर्ण साधना स्थली के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इससे सबसे आगे है।
उन्होंने कहा कि ध्यान, योग, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अनुसंधान के लिए पुरी और जगन्नाथ संस्कृति से जुड़ा क्षेत्र विश्व के श्रेष्ठ स्थलों में से एक बन सकता है।
इस दौरान उन्होंने योग और आध्यात्मिक योग के अंतर को भी समझाया तथा आध्यात्मिक योग को विज्ञान की संज्ञा देते हुए इसे सभी धर्मों से ऊपर बताया।
योगी प्रियव्रत अनिमेष ओडिशा प्रवास पर भुवनेश्वर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पुरी में महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन किए तथा भुवनेश्वर में प्रभु लिंगराज के दर्शन किए।
भुवनेश्वर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें ओडिशा को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर योगी प्रियव्रत अनिमेष ने अपनी पुस्तक “आकाश” भेंट की, जो चेतना, आत्मबोध और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित उनके चिंतन का प्रतीक है।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
