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2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था
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एसटी को 22.5%, एससी को 16.25% और एसईबीसी को 11.25% आरक्षण
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इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग, आईटी समेत सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में मिलेगा लाभ
भुवनेश्वर। सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ओडिशा सरकार ने तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) तथा सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के लिए आरक्षण को बढ़ाने की घोषणा की है। नई आरक्षण व्यवस्था 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगी।
4 अप्रैल को प्रस्ताव को मिली थी मंजूरी
राज्य मंत्रिमंडल ने 4 अप्रैल को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने बुधवार को इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी।
नौकरियों में लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप
नई नीति के तहत इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, नर्सिंग, फार्मेसी, कृषि, पशु चिकित्सा, वास्तुकला तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आरक्षण को सामान्य उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों में लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप किया गया है।
तकनीकी शिक्षा में नहीं था कोई आरक्षण
नई व्यवस्था के अनुसार अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.5 प्रतिशत कर दिया गया है। अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षण 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत किया गया है। वहीं सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) को पहली बार 11.25 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। इससे पहले इस वर्ग के लिए तकनीकी शिक्षा में कोई आरक्षण नहीं था।
आबादी में एसटी की हिस्सेदारी 22.85 तथा एससी की 17.13 प्रतिशत
सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य की जनसंख्या संरचना के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ओडिशा की कुल आबादी में एसटी की हिस्सेदारी 22.85 प्रतिशत तथा एससी की 17.13 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पहले ही इस निर्णय की घोषणा करते हुए इसके शीघ्र क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे। सरकार का दावा है कि यह लंबे समय से लंबित मांग थी, जिसे पूर्ववर्ती सरकारें पूरा नहीं कर सकी थीं।
पेशेवर क्षेत्रों में इन वर्गों की भागीदारी थी सीमित
अधिकारियों के अनुसार अब तक एक विसंगति यह थी कि एससी, एसटी और एसईबीसी वर्गों को सामान्य डिग्री कॉलेजों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता था, लेकिन तकनीकी और मेडिकल शिक्षा में उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम था। इसके कारण प्रतिष्ठित पेशेवर क्षेत्रों में इन वर्गों की भागीदारी सीमित रह जाती थी।
नई आरक्षण व्यवस्था सभी शैक्षणिक संस्थानों लागू
नई आरक्षण व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों, विश्वविद्यालयों, संबद्ध महाविद्यालयों, आईआईटी में राज्य कोटे की सीटों, पॉलिटेक्निक संस्थानों तथा आईटीआई में लागू होगी। इसके अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, कृषि और संबद्ध विज्ञानों के पाठ्यक्रम शामिल होंगे।
सभी ने निर्णय का स्वागत किया
शिक्षा जगत और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। माना जा रहा है कि इससे लाखों प्रतिभाशाली लेकिन वंचित विद्यार्थियों को उच्च तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में बेहतर अवसर मिलेंगे तथा राज्य के भविष्य के लिए अधिक समावेशी प्रतिभा आधार तैयार होगा।
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