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मुख्यमंत्री माझी ने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से की चर्चा
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खदानों की मंजूरी, रेल-बंदरगाह ढांचा और खनिज परिवहन को लेकर उठाए अहम मुद्दे
भुवनेश्वर। ओडिशा के खनन क्षेत्र को और अधिक गति देने तथा खनिज अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को लोक सेवा भवन में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में खनन परियोजनाओं की मंजूरियों में आ रही बाधाओं को दूर करने और विकास कार्यों में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया।
खनिज उत्पादन में देश में अग्रणी है ओडिशा
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि ओडिशा देश में खनिज उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य में लगभग 471 मिलियन टन खनिजों का उत्पादन हुआ है, जिससे करीब 46 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन क्षेत्र की निरंतर प्रगति के लिए केंद्र सरकार का सक्रिय सहयोग आवश्यक है, विशेषकर नीलाम किए गए खनन ब्लॉकों को वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरियां शीघ्र प्रदान करने के मामले में।
मुख्यमंत्री ने केंद्र के समक्ष रखीं प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें नीलाम किए गए सभी खनन ब्लॉकों के लिए तत्काल वन एवं पर्यावरणीय मंजूरी, सासुबोहुमाली बॉक्साइट ब्लॉक और ठाकुरानी लौह अयस्क ब्लॉक को ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) को आवंटित करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा खनिज परिवहन को अधिक प्रभावी और किफायती बनाने के लिए रेल एवं बंदरगाह अवसंरचना के तेजी से विकास, बंद पड़ी कोयला खदानों में फ्लाई ऐश के उपयोग से बैकफिलिंग के लिए उपयुक्त नीति ढांचा तैयार करने तथा खनिजों के उच्च-स्तरीय विश्लेषण के लिए अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
समस्याओं के समाधान के लिए होगी उच्चस्तरीय बैठक
केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने राज्य द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि खनन क्षेत्र से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकार की भागीदारी वाली एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की जाएगी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि खनन परियोजनाओं से जुड़े लंबित मामलों के समाधान के लिए केंद्र सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास पर जोर
बैठक में दोनों नेताओं ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं को संतृप्ति मोड में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) निधि, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) और केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को एकीकृत कर विकास कार्यों को गति देने पर सहमति जताई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार ने “सीएम संपदा” नामक विशेष पहल तैयार की है।
केंद्रीय उपक्रमों के अधिकारियों ने भी रखीं समस्याएं
बैठक में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, एनएलसी इंडिया लिमिटेड, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड, नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड तथा भारतीय खान ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और अपनी-अपनी समस्याओं एवं सुझावों को प्रस्तुत किया। बैठक में मुख्य सचिव अनु गर्ग, विकास आयुक्त, विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों तथा कोयला एवं खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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