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ओडिशा श्रम विभाग की निष्क्रियता पर भड़का भारतीय मजदूर संघ

  • छंटनी और मजदूर आत्महत्या मामले में सरकार को घेरा

  • बालेश्वर के मजदूर तन्मय सेन की आत्महत्या को बताया “मजदूर अधिकार आंदोलन की शहादत”

  • बीएमएस ने श्रम विभाग पर उद्योगपतियों के पक्ष में काम करने का लगाया आरोप

भुवनेश्वर। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), ओडिशा प्रदेश ने राज्य के श्रम विभाग पर मजदूरों की समस्याओं की अनदेखी और उद्योगपतियों के प्रति झुकाव का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ओडिशा विधानसभा के समक्ष चल रहे बीएमएस के आंदोलन को 10 दिन पूरे होने के बावजूद सरकार की ओर से किसी ठोस पहल नहीं किए जाने पर संगठन ने नाराजगी जताई है।

बीएमएस के प्रदेश अध्यक्ष बादल महाराणा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि श्रम विभाग की लगातार चुप्पी और निष्क्रियता यह दर्शाती है कि विभाग मजदूर हितों की बजाय पूंजीपतियों और उद्योग प्रबंधन के हितों को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि श्रम मंत्रालय को तय नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार तुरंत हस्तक्षेप कर द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय वार्ता शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया।

महारणा  ने कहा कि वार्ता सफल हो या असफल, यह बाद का विषय है, लेकिन बातचीत की पहल तक न करना यह साबित करता है कि श्रम विभाग अपनी जिम्मेदारियों से बच रहा है। राज्य सरकार के इस रवैये से देशभर के मजदूरों में आक्रोश बढ़ रहा है और ओडिशा आंदोलन के समर्थन में विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।

भारतीय मजदूर संघ ने बालेश्वर के मजदूर तन्मय सेन की आत्महत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे व्यापक छंटनी और आर्थिक संकट का परिणाम बताया है। संगठन का आरोप है कि लगातार हो रही छंटनी के कारण अनेक श्रमिक परिवार गंभीर आर्थिक और मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं।

बीएमएस ने तन्मय सेन को “मजदूर अधिकार आंदोलन का शहीद” घोषित करते हुए कहा कि एक मजदूर की जान जाने के बावजूद सरकार और श्रम विभाग संवेदनहीन बने हुए हैं। संगठन ने इसे अत्यंत निंदनीय और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया।

बीएमएस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की नौकरशाही पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कई विभागों में अब भी पुरानी बीजेडी सरकार की मानसिकता हावी है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और कार्य गति प्रभावित हो रही है, जिससे वर्तमान सरकार की छवि जनता के बीच धूमिल हो रही है।

महाराणा ने कहा कि नौकरशाहों का अड़ियल रवैया सरकार और मजदूरों के बीच संवाद की प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है।

भारतीय मजदूर संघ ने राज्य सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग श्रम विभाग की ओर से तत्काल द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय वार्ता शुरू करने की है, जिसमें सरकार, उद्योग प्रबंधन और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

संगठन ने राज्य में चल रही व्यापक छंटनी पर तत्काल रोक लगाने, प्रभावित श्रमिक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा मृतक मजदूर तन्मय सेन के परिवार को उचित मुआवजा और एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

बीएमएस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द कोई सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र किया जाएगा। संगठन ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और श्रम विभाग की होगी।

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