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Dr Virendra Singh Solanki, Mahamantri Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad

जेन-जी को जिम्मेदार और राष्ट्रभक्त बना रहा है अभाविप : डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी

  •     सोशल मीडिया ट्रेंड और ‘काकरोच पार्टी’ पर बोले अभाविप राष्ट्रीय महामंत्री

  •     समस्या का समाधान बनें, खुद समस्या नहीं’

भुवनेश्वर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा है कि देश का युवा और जेन-जी आज जिम्मेदारी, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है तथा अभाविप युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

विशेष बातचीत के दौरान डॉ सोलंकी ने सोशल मीडिया पर अचानक चर्चा में आए “काकरोच पार्टी” मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी को समाज या व्यवस्था में कोई समस्या दिखाई देती है, तो उसे समाधान का हिस्सा बनना चाहिए, न कि स्वयं समस्या बन जाना चाहिए।

डॉ सोलंकी इंदौर से हैं तथा एमबीबीएस करने के बाद एमडी कर रहे हैं तथा इसके साथ ही वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के राष्ट्रीय महामंत्री के पद को निर्वहन कर रहे हैं।

‘सोशल मीडिया पर सिर्फ माइलेज लेने की कोशिश’

डॉ सोलंकी ने कहा कि इस तरह के मुद्दों का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया पर चर्चा और लोकप्रियता हासिल करना होता है। उन्होंने कहा कि लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे, बल्कि केवल रील और मनोरंजन के तौर पर देख रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस कथित पार्टी के लगभग 90 प्रतिशत फॉलोअर भारत के बाहर, खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से हैं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत के लोग ऐसे विचारों का समर्थन नहीं कर रहे हैं।

‘देश का युवा अभाविप के साथ’

अभाविप नेता ने कहा कि भारत का युवा वर्ग और जेन-जी आज अभाविप के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि संगठन युवाओं को केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक, राष्ट्रभक्त और समाज के प्रति संवेदनशील युवा के रूप में तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अभाविप युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ उन्हें समाज की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित कर रहा है।

जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को दी नसीहत

डॉ सोलंकी ने सार्वजनिक जीवन और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को भी संयमित भाषा के इस्तेमाल की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिससे किसी की भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संवाद में मर्यादा और शालीनता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है और सभी को इसका पालन करना चाहिए।

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