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120 मेगावाट उत्पादन ठप
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ट्रांसफार्मर फटने से लगी आग
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छहों उत्पादन इकाइयों को बंद करना पड़ा
कोरापुट। ओडिशा के कोरापुट जिला स्थित माछकुंड जलविद्युत केंद्र में भीषण आग लगने से 120 मेगावाट क्षमता वाले बिजली उत्पादन केंद्र का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया। घटना के बाद संयंत्र की सभी छह उत्पादन इकाइयों को बंद कर दिया गया।
हालांकि समय रहते सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन घने धुएं के कारण दो कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ हुई, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
ट्रांसफार्मर फटने के बाद फैली आग
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब 12 बजे अंकाडेली स्थित पावर हाउस के बाहर लगे 2.5 एमवीए, 11/0.4 केवी ट्रांसफार्मर से जुड़े करंट ट्रांसफार्मर (सीटी) में विस्फोट हो गया। यह ट्रांसफार्मर स्थानीय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोग किया जाता था। विस्फोट के बाद उससे जुड़े केबलों में आग लग गई और आग तेजी से केबल गैलरी के रास्ते मुख्य पावर हाउस तक पहुंच गई। इससे विद्युत उपकरणों और अन्य संबंधित मशीनों को भारी नुकसान पहुंचा।
धुएं से मची अफरा-तफरी
घटना के बाद उत्पादन इकाई के भीतर से घना धुआं निकलने लगा, जिससे कर्मचारियों और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। घटना के समय संयंत्र की सभी छह उत्पादन इकाइयां चालू थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेटरों ने तुरंत सभी मशीनों को बंद कर दिया और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। धुएं के कारण दो कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी हुई। उन्हें अंकाडेली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू
आग बुझाने के लिए लाम्टापुट अग्निशमन सेवा और नंदापुर अग्निशमन सेवा की टीमों को मौके पर भेजा गया। पावर हाउस के कर्मचारियों की मदद से करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद शाम लगभग 4 बजे आग पर काबू पाया जा सका।
डुडुमा जलप्रपात के पास स्थित है परियोजना
माछकुंड जलविद्युत परियोजना ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा पर प्रसिद्ध डुडुमा जलप्रपात के निकट स्थित है। इस परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 120 मेगावाट है, जो छह इकाइयों में विभाजित है। 1945 में हुए समझौते तथा बाद में 1978 और 2020 में किए गए संशोधनों के अनुसार, इस परियोजना से होने वाली बिजली और रखरखाव खर्च ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच 50:50 अनुपात में साझा किए जाते हैं। हालांकि परियोजना का प्रबंधन, संचालन और प्रशासनिक नियंत्रण आंध्र प्रदेश सरकार तथा एपी पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन के पास है।
बहाली में लग सकते हैं छह महीने से अधिक
सूत्रों के मुताबिक, अब एपीजेनको द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद मरम्मत और उपकरण बदलने का कार्य शुरू होगा। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, बिजली उत्पादन पूरी तरह बहाल होने में छह महीने से अधिक समय लग सकता है। इससे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति और उत्पादन व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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