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ओडिशा में बिजली क्षेत्र में हड़ताल पर 6 महीने की रोक

  •           सरकार ने लागू किया एस्मा

  •           बिजली आपूर्ति बाधित होने से रोकने के लिए बड़ा फैसला

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्यभर में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़े सभी प्रतिष्ठानों में अगले छह महीनों तक हड़ताल और विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। सरकार ने यह कदम बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा रोकने के उद्देश्य से उठाया है।

गृह विभाग के विशेष शाखा द्वारा 21 मई 2026 की देर रात जारी आदेश में ओडिशा आवश्यक सेवाएँ (रखरखाव) अधिनियम, 1988 के तहत यह प्रतिबंध लागू किया गया है।

सभी कंपनियां भी दायरे में

यह आदेश राज्य की प्रमुख बिजली कंपनियों ग्रिडको, ओपीटीसीएल, ओएचपीसी और ओपीजीसी पर लागू होगा।

इसके अलावा राज्य में कार्यरत टाटा पावर की चार वितरण कंपनियां, टीपीसीओडीएल, टीपीएनओडीएल, टीपीएसओडीएल और टीपीडब्ल्यूओडीएल, भी इसके दायरे में रहेंगी। आदेश में राज्य की अन्य बिजली उत्पादन कंपनियों को भी शामिल किया गया है।

हड़ताल की व्यापक परिभाषा तय

सरकार ने आदेश में कहा है कि जनहित में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने तथा औद्योगिक शांति कायम रखने के लिए हड़तालों पर रोक आवश्यक है। आदेश के अनुसार हड़ताल में काम बंद करना, सामूहिक रूप से काम से इनकार करना, बिना अनुमति अनुपस्थित रहना या सामूहिक रूप से रोजगार स्वीकार करने से इनकार करना भी शामिल माना जाएगा।

प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू

यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अगले छह महीने तक प्रभावी रहेगा। माना जा रहा है कि यह कदम बिजली वितरण कंपनियों के कर्मचारियों में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए उठाया गया है। हाल के दिनों में छंटनी, वेतन, आउटसोर्सिंग और सेवा शर्तों को लेकर कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा था।

औद्योगिक विकास के बीच निर्बाध बिजली पर सरकार का फोकस

बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को देखते हुए चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बिजली क्षेत्र में लंबी हड़ताल होती है तो उसका असर घरों, उद्योगों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

एस्मा की धाराओं के तहत जारी हुआ आदेश

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश ओडिशा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1988 की धारा 3(1) तथा धारा 2 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया है।

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