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47 साल पुराने नियम रद्द
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कारोबार को आसान बनाने की दिशा में बड़ा फैसला
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अब डीजल बिक्री के लिए अलग राज्य स्तरीय लाइसेंस की जरूरत नहीं
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने कारोबार को सरल और निवेश अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 47 साल पुराने ओडिशा हाई स्पीड डीजल (डीलर्स लाइसेंसिंग) आदेश, 1979 को समाप्त करने का फैसला किया है। राज्य मंत्रिमंडल ने इस संबंध में ओडिशा हाई स्पीड डीजल (डीलर्स लाइसेंसिंग) निरसन आदेश, 2026 को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की उस सलाह के अनुरूप लिया गया है, जिसमें देशभर में हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की खुदरा बिक्री के लिए रिटेल सेल लाइसेंस (आरएसएल) की अनिवार्यता समाप्त करने की सिफारिश की गई थी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद डीजल डीलरों को राज्य स्तर पर अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे लगभग पांच दशक पुराने नियामकीय ढांचे का अंत हो जाएगा, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत लागू था। सरकार का मानना है कि इस फैसले से पेट्रोलियम खुदरा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और कारोबार करने में आने वाली बाधाएं कम होंगी।
हालांकि, नए पेट्रोल पंप और डीजल आउटलेट स्थापित करने के लिए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य रहेगा। इस प्रक्रिया में अग्निशमन, निर्माण, राजस्व तथा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) सहित विभिन्न विभागों की मंजूरी पहले से शामिल रहेगी। अब डीलरों को लाइसेंस के लिए अलग-अलग विभागों से दोबारा अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत हाई स्पीड डीजल की बिक्री और वितरण पर निगरानी जारी रहेगी।
फैसले से होने वाले प्रमुख लाभ
– नए पेट्रोल पंप और डीजल आउटलेट तेजी से स्थापित हो सकेंगे
– कागजी प्रक्रिया और प्रशासनिक बोझ में कमी आएगी
– राष्ट्रीय स्तर की पेट्रोलियम सुधार नीति के अनुरूप व्यवस्था बनेगी
– सार्वजनिक हित और सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी जारी रहेगी
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