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भौंरी यात्रा के शुभ अवसर पर रथ निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार
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चंदन यात्रा में दिखी भक्ति और आस्था की अद्भुत छटा
पुरी। पुरी में विश्वविख्यात रथयात्रा की तैयारियों के तहत रथखला में शनिवार को पारंपरिक ‘चका-अखा डेरा नीति’ अनुष्ठान संपन्न किया गया। यह अनुष्ठान भौंरी यात्रा के शुभ अवसर पर आयोजित हुआ, जिसे रथ निर्माण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।
अनुष्ठान के दौरान दिव्य अनुमति प्राप्त करने के बाद कारीगरों ने नव निर्मित पहियों को रथों की धुरियों से जोड़ा। यह प्रक्रिया भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीनों रथों के यांत्रिक निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। अनुष्ठान के बाद तैयार पहियों को सुरक्षित रखने के लिए रथखला के निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया गया।
अब तक तीनों रथों के लिए कुल 19 पहियों का निर्माण पूरा हो चुका है। रथ अमीन ने अग्र भाग के बीम और जोका निर्माण के लिए 20 फीट लंबे धौरा लकड़ी के चार सेट उपलब्ध कराए हैं। वहीं महाराणा सेवकों ने पांच जोका और चार मुहांटा संरचनाओं के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी है।
शुक्रवार तक कारीगर साल गुज, तिख गुज, जल यंत्र, कुडुका, ओरा तथा एक सिंहासन सेट जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण पूरा कर चुके थे। इसके अलावा तीन ठकिया राहा बीम की कटाई का कार्य भी संपन्न कर लिया गया, जिससे रथ निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है।
चका-अखा डेरा नीति को रथयात्रा की तैयारियों का एक पवित्र और महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, जिसमें आस्था, परंपरा और उत्कृष्ट शिल्पकला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
इधर, चंदन यात्रा के पावन अवसर पर पुरी स्थित पवित्र नरेंद्र पुष्करिणी में भगवान के विजय विग्रहों की भव्य नौका यात्रा श्रद्धा और भक्ति के वातावरण के बीच संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का मनमोहक दृश्य देखने को मिला।
सजे-धजे नौकाओं पर विराजमान भगवान के विजय विग्रहों की शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, मंत्रोच्चार और भजनों के बीच आयोजित इस नौका विहार को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु नरेंद्र पुष्करिणी पहुंचे।
जल के बीच दीपों और सजावट से सुसज्जित नौकाओं में भगवान की यात्रा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
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