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राजस्व विभाग को नागरिक-केंद्रित सेवाओं का मॉडल बनाने पर जोर

  •           लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

  •           सुधारों और डिजिटल सेवाओं पर फोकस

भुवनेश्वर। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को नागरिकों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लोक सेवा भवन में सोमवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मंत्री सुरेश पुजारी ने की।

बैठक में विभाग की उपलब्धियों, पारदर्शी पहलों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। मंत्री ने निर्देश दिया कि राजस्व सेवाओं को और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए सुधारों को तेज किया जाए, ताकि यह विभाग अन्य विभागों के लिए उदाहरण बन सके।

भूमि अभिलेख सुधार में बड़ी प्रगति

कॉलम-2 आरओआर सुधार प्रक्रिया के तहत अब तक 62.25 लाख भूमि अभिलेखों का सर्वेक्षण किया गया है, जिनमें से 58.09 लाख रिकॉर्ड पूरी तरह ठीक किए जा चुके हैं। इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक विशेष मोबाइल एप भी विकसित किया गया है।

सेवाओं के सरलीकरण और डिजिटलीकरण पर जोर

राज्य में सब-प्लॉट पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एसओपी जारी की गई है। ओआरटीपीएस अधिनियम के तहत पिछले वित्त वर्ष में 1 करोड़ से अधिक सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें भूमि रिकॉर्ड, पंजीकरण और प्रमाणपत्र शामिल हैं।

डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए 11 राजस्व सेवाओं को “आम साथी” व्हाट्सऐप चैटबॉट से जोड़ा गया है, जिससे लोग घर बैठे सेवाएं प्राप्त कर सकें। इसके अलावा 2025-26 के दौरान 108 नए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोले गए हैं।

ई-रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन सुविधाएं

“ई-रजिस्ट्रेशन ओडिशा” मोबाइल एप के जरिए दस्तावेज पंजीकरण के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, ईसी और सीसी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ऑनलाइन सीमांकन सेवा भी शुरू की गई है, जिससे समयबद्ध और पारदर्शी सेवा सुनिश्चित हो रही है।

अपार्टमेंट और भूमि सुधार में बदलाव

अपार्टमेंट पंजीकरण को सरल बनाने के लिए अलॉटियों के संघ को केवल 50 हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी पर कॉमन एरिया पंजीकरण की सुविधा दी गई है। व्यक्तिगत फ्लैट बिक्री के दौरान कॉमन एरिया के हिस्से पर 5% स्टांप ड्यूटी तय की गई है।

नियमों में संशोधन और श्रेणियों का सरलीकरण

ओडिशा सर्वे एवं सेटलमेंट नियम, 1962 में संशोधन कर तहसीलदारों को पुराने भूमि रिकॉर्ड सुधारने का अधिकार दिया गया है। भूमि की 7,797 किस्मों को घटाकर 22 श्रेणियों में और 750 प्रकार के सत्व को चार श्रेणियों में सरल किया गया है।

एमएसएमई और स्टार्टअप को राहत

एमएसएमई और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) अनुमति से छूट दी गई है। साथ ही 57 स्थानों के अंग्रेजी नामों की वर्तनी सुधार के लिए जनमत आमंत्रित किया गया है।

श्री जगन्नाथ भूमि सेल का गठन

पुरी में भगवान जगन्नाथ की भूमि की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए विभाग में विशेष “श्री जगन्नाथ भूमि सेल” स्थापित किया गया है।

पारदर्शिता के लिए नई ट्रांसफर नीति

ओएएस और ओआरएस अधिकारियों के लिए नई स्थानांतरण नीति लागू की गई है, जिससे प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी।

भूमिहीनों को भूमि वितरण

वसुंधरा योजना के तहत 28,531 भूमिहीन परिवारों को 4 डिसमिल आवासीय भूमि प्रदान की गई है। वहीं 25,643 सरकारी एवं अनुदानित शैक्षणिक संस्थानों को भूमि पट्टे दिए गए हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ अरबिंद पाढ़ी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। विभाग ने दोहराया कि वह पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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