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सच्चा महिला सशक्तिकरण सिर्फ आर्थिक ही नहीं, सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी भी जरूरी
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में आज मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महिला सशक्तिकरण को लेकर पिछली सरकार और विपक्ष पर जमकर हमला बोला। मुख्यमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा के लिए गुरुवार को आयोजित विशेष सत्र में के दौरान कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में समान भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से विभिन्न राजनीतिक दल महिला सशक्तिकरण की बात तो करते रहे हैं, लेकिन उसकी परिभाषा को सीमित रखकर केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक ही केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह बनाकर कुछ आर्थिक सहायता देना सशक्तिकरण का पूर्ण रूप नहीं है, बल्कि वास्तविक सशक्तिकरण वह है जिसमें महिलाएं अपने जीवन, परिवार और समाज के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।
स्वतंत्रता के 75 वर्ष के बाद भी आधी आबादी उपेक्षित
उन्होंने कहा कि देश आज स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर चुका है और विकास के कई आयाम स्थापित हुए हैं, फिर भी आधी आबादी आज भी स्वयं को उपेक्षित महसूस करती है। मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों की आलोचना करते हुए कहा कि विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर कई दल विरोधी रुख अपनाते हैं, क्योंकि इससे उनके राजनीतिक हित प्रभावित होते हैं।
विभिन्न राजनीतिक दलों ने न्याय देने में उपेक्षा की
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि कभी पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण तो कभी मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग के बहाने विभिन्न राजनीतिक दलों ने महिलाओं को उचित न्याय देने में उपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है।
कांग्रेस को अपना इतिहास को समझना चाहिए
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पास 1984 में लोकसभा में 414 सीटें और राज्यसभा में 159 सीटें थीं, यानी दो-तिहाई नहीं बल्कि तीन-चौथाई बहुमत था। इसके बावजूद उन्होंने इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित क्यों नहीं किया। आज जो लोग सरकार पर उंगली उठा रहे हैं, उन्हें अपने इतिहास को समझना चाहिए।
विस और लोस में बीजद विरोध क्यों
उन्होंने कहा कि बीजू जनता दल के सदस्य पंचायती राज व्यवस्था में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं और आज भी चर्चा के दौरान इसे दोहराएंगे, लेकिन जब विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण की बात आती है, तो वे महिला विरोधी रुख क्यों अपनाते हैं?
उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि यहां बैठे जनप्रतिनिधि या उनके दल के शीर्ष नेता स्वयं सरपंच या जिला परिषद के चुनाव नहीं लड़ते। इसलिए पंचायत चुनावों में 100 प्रतिशत आरक्षण होने पर भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती, क्योंकि इससे उनके व्यक्तिगत हित प्रभावित नहीं होते।
विपक्ष की आशंकाएं पूरी तरह निराधार
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष के नेता ने उन्हें पत्र लिखकर सीटों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। लेकिन संसद में गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी। ऐसे में उसी अनुपात में ओडिशा विधानसभा की सीटों में भी लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है। इसलिए विपक्ष की आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं और इससे उनके हितों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
महिलाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया
महिलाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, चाहे वह शिक्षा हो, परिवहन हो या रक्षा क्षेत्र। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और देश की भविष्य निर्माण प्रक्रिया में उनकी भूमिका केंद्रीय है।
मुख्यमंत्री ने ओडिशा की बेटी और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख करते हुए इसे महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण का प्रतीक बताया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लगातार नौ बार बजट पेश कर एक रिकॉर्ड स्थापित किया है।
केंद्रीय योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, जैसे मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया और प्रधानमंत्री आवास योजना, में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। राज्य सरकार की ‘सुभद्रा योजना’ और ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
देशभर में 14.5 लाख महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधि
मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य की ‘ममता योजना’ और केंद्र की ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ को एकीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 14.5 लाख महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं, जो उनकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।
2029 के आम चुनाव से आरक्षण लागू होने का विश्वास
अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आगामी 2029 के आम चुनाव से महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण लागू किया जाएगा, जिससे देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।
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