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अगला चरण बाहरी रत्न भंडार का होगा
पुरी। श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी के लंबे समय से प्रतीक्षित रत्न भंडार की पहली चरण की इन्वेंटरी और दस्तावेजीकरण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इस चरण में चालन्ती भंडार में रखे आभूषणों की गिनती की गई।
श्रीमंदिर मुख्य प्रशासक डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी ने बताया कि चालन्ती भंडार में रखे सभी आभूषणों का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। हालांकि, कुछ आभूषण जो वर्तमान में देवताओं पर सजाए गए हैं, जैसे कि राही रेखा और रत्नचिता श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र और देवी सुभद्रा पर, को इस चरण में गिना नहीं जा सका। इन्हें अगले चरण में दस्तावेजीकृत किया जाएगा जब अनुष्ठानों की अनुमति होगी।
इन्वेंटरी प्रक्रिया के तहत 1978 की इन्वेंटरी सूची को प्राथमिक संदर्भ के रूप में उपयोग किया गया। प्रत्येक आभूषण का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया, जिसमें सटीक गिनती और वजन माप, उच्च-रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी और 3डी लेजर मैपिंग शामिल है। सत्यापन के बाद सभी आभूषण पारंपरिक भंडार सेवायतों को वापस सौंप दिए गए।
डॉ पाढ़ी ने कहा कि अगला चरण बाहरी रत्न भंडार का होगा। इसकी तिथि पहले से घोषित की जाएगी। संपूर्ण प्रक्रिया ओडिशा राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पूरी की गई। यह लगभग 48 साल में रत्न भंडार की पहली व्यापक इन्वेंटरी है और मंदिर के अनमोल खजाने के प्रबंधन में पारदर्शिता की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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