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दिव्यांगजनों की समावेशी पहचान का ऐतिहासिक अवसर होगी जनगणना-2027 : आठवले

नई दिल्ली। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना देश में दिव्यांगजनों की समावेशी और सटीक पहचान का एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगी, जिसके माध्यम से दिव्यांगता की सभी 21 श्रेणियों को व्यवस्थित रूप से चिन्हित किया जा सकेगा।

आठवले यहां दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोज़गार संवर्धन का राष्ट्रीय केंद्र (एनसीपीईडीपी) द्वारा तैयार सांसदों के लिए दिव्यांगता समावेशन पर एक पुस्तिका के विमोचन के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित गणनाकारों और उन्नत डेटा संग्रह प्रणाली के जरिए प्राप्त आंकड़े सरकार को दिव्यांगजनों के लिए अधिक प्रभावी, लक्षित और समावेशी नीतियां बनाने में मदद करेंगे।
कार्यक्रम में सांसद ई.टी. मोहम्मद बशीर, ईटाला राजेंद्र, डॉ. फौजिया खान, डॉ. गुरु प्रकाश पासवान, नेहा जोशी और अनीश गावंडे सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि यह हैंडबुक सांसदों को दिव्यांगजनों से जुड़ी चुनौतियों को समझने और उन्हें दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगी। इससे दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।
आठवले ने कहा कि मोदी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिनमें सुगम्य भारत अभियान, यूडीआईडी पोर्टल, पीएम-दक्ष कौशल विकास कार्यक्रम और आयुष्मान भारत शामिल हैं।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने दिव्यांगजनों के स्वास्थ्य बीमा कवरेज को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि देश में 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगजनों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है। इसका मुख्य कारण उच्च प्रीमियम और सीमित कवरेज है। उन्होंने सुझाव दिया कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए व्यापक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सहायता शामिल की जानी चाहिए।
राज्यसभा सांसद जेबी मैथर ने कहा कि यह हैंडबुक सांसदों को दिव्यांगता से जुड़े मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगी और संसद में इन विषयों को प्रभावी ढंग से उठाने में सहायक होगी।
आठवले ने कार्यक्रम को समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास की प्रक्रिया में किसी को भी पीछे न छोड़ना है।
साभार -हिस

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