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एआई और सोशल मीडिया का दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती : ओम बिरला

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और विश्वसनीय, पारदर्शी तथा जवाबदेह सोशल मीडिया ढांचे का निर्माण बहुत जरूरी है। एआई और सोशल मीडिया का दुरुपयोग दुष्प्रचार, साइबर अपराध और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहा है, जिनसे निपटना विश्व की विधायिकाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बिरला ने गुरुवार को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में कहा कि एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों ने लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता बढ़ाई है। भारत की संसद और विधानसभाओं को पेपरलेस बनाने और उन्हें एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संसद और सरकार के साझा प्रयासों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाया गया है तथा नए जनकल्याणकारी कानून बनाए गए हैं। इन सुधारों से भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बिरला ने कहा कि जनता की दृष्टि में संसदीय संस्थाओं की गरिमा, विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी लोकतांत्रिक इकाइयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श से वैश्विक चुनौतियों के सामूहिक समाधान निकलेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं में नागरिकों का विश्वास और गहरा होगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में 53 संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल हुए हैं। इसके अलावा 14 अर्ध-स्वायत्त संसदों के पीठासीन अधिकारी, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के महासचिव तथा अन्य अधिकारी भी प्रतिनिधि के रूप में भाग ले रहे हैं।

इसके पूर्ण सत्रों में संसद में एआई के उपयोग के दौरान नवाचार, निगरानी और अनुकूलन के बीच संतुलन स्थापित करना, सोशल मीडिया का सांसदों पर प्रभाव, संसद के प्रति जन सामान्य की समझ बढ़ाने और मतदान के बाद भी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नवीन रणनीतियां, संसद सदस्यों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, और लोकतांत्रिक संस्थानों को सुदृढ़ बनाने में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका जैसे कई विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। तीन दिवसीय यह सम्मेलन 16 जनवरी तक चलेगा।
साभार – हिस

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