नई दिल्ली। कोरोना के चलते अनाथ हुए बच्चों के मामले पर सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि मार्च, 2020 से अब तक 1742 बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है।
आयोग ने कहा है कि 7464 बच्चों के माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु हुई है। आयोग ने बच्चों को आर्थिक मदद की भी मांग की है। गत 28 मई को सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में जिला प्रशासन को ये सुनिश्चित करने को कहा था कि कोरोना महामारी में अपने अभिभावकों को खो चुके बच्चों को कोई दिक्कत न हो और उनकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी हो सके।
सुनवाई के दौरान जस्टिस एल नागेश्वर राव ने कहा कि हमें नहीं पता कि कि कितने बच्चे सड़क पर भूखे हैं। हम उनकी उम्र नहीं जानते हैं। इतने बड़े देश में उनके साथ क्या हो रहा है, ये कल्पना करना मुश्किल है। कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को निर्देश दिया था कि वो ऐसे बच्चों का डाटा वेबसाइट पर अपलोड करें।
कोर्ट ने सरकार से राहत के लिए किये कामों की जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान एमिकस क्युरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया था कि महामारी के चलते या दूसरी वजह से अपने एक या दोनों अभिभावकों को खो चुके बच्चों को राहत के लिए प्रयास करने की ज़रूरत है। ऐसे बच्चे विशेषकर लड़कियां मानव तस्करी का शिकार हो रही हैं। लिहाज़ा कोर्ट ज़रूरी निर्देश जारी करे।
साभार-हिस
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