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“विकसित ओडिशा 2036” में शोध, नवाचार और वैज्ञानिकों की भूमिका पर जोर
भुवनेश्वर। भुवनेश्वर स्थित आईएचएम में आयोजित “विजनरी टॉक एट विकसित ओडिशा 2036” कार्यक्रम में वैज्ञानिकों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण विचार सामने आए।
प्रो. करुणाकर नंद, जो कि इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिक्स भुवनेश्वर के वर्तमान निदेशक हैं, ने कहा कि विकसित राष्ट्र के निर्माण तथा देश की जीडीपी की वृद्धि में वैज्ञानिकों की भूमिका है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और विकसित बनाने में वैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चीन की जीडीपी को बढ़ाने तथा अर्थव्यवस्था को विकसित करने में वहां के वैज्ञानिकों का बड़ा योगदान रहा है। वर्तमान समय में चीन में वैज्ञानिकों की संख्या अधिक है, जिससे वहां शोध, नवाचार और उत्पादों में मूल्य संवर्धन तेजी से हो रहा है।
प्रो नंद ने देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि में भी वैज्ञानिकों की भूमिका को विस्तार से
रेखांकित करते हुए कहा कि जब शोध और तकनीकी नवाचार बढ़ते हैं, तो उद्योगों की उत्पादकता में सुधार होता है, नए उत्पाद विकसित होते हैं और निर्यात में वृद्धि होती है। इससे सीधे तौर पर जीडीपी में बढ़ोतरी होती है और अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना शोध और अनुसंधान के किसी भी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि हमें देश और राज्य को विकसित बनाना है, तो वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ शोध की संस्कृति को भी मजबूत करना होगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वक्ता ने भी अपने संबोधन में कहा कि ओडिशा के विकास के लिए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा “विकसित ओडिशा 2036” का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि खासतौर पर ओडिशा के वैज्ञानिकों की भूमिका इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण होगी। दुनिया भर के विकास के आंकड़ों और उदाहरणों को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि जिन देशों में वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों की संख्या अधिक है, वे देश तेजी से विकसित हुए हैं।
इस अवसर पर यह भी कहा गया कि इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिक्स भुवनेश्वर जैसे संस्थान “विकसित ओडिशा 2036” के लक्ष्य को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएंगे। जैसे-जैसे राज्य विकास की ओर अग्रसर होगा, वैसे-वैसे ऐसे वैज्ञानिक और शोध संस्थानों की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और छात्रों ने इस बात पर सहमति जताई कि ओडिशा को विकसित राज्य बनाने के लिए शिक्षा, शोध और नवाचार को प्राथमिकता देनी होगी। सभी ने मिलकर वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और राज्य के विकास में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
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