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भारत प्रकाशन के कार्यक्रम में बोले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने शुक्रवार को कहा कि देश को भारत के तरीके से खड़ा होना विश्व की शांति, समृद्धि के लिए आवश्यक है। इसे अंग्रेजी में रिलीजन और धर्म के अंतर से समझा जा सकता है। अन्यथा समानार्थी उपयोग से भ्रम पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि रिलीजन का तात्पर्य उपासना से है जबकि समाज को बिना किसी स्वार्थ लौटाना धर्म है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया ने देश के इस भाव को प्रत्यक्ष रूप से देखा। एक ओर जहां सभा देशों में महामारी के दौरान सरकारी मशीनरी ही सक्रिय थी वहीं, देश में सरकारी मशीनरी के साथ लाखों लोग मदद के लिए घरों से बाहर निकलें, यह जानते हुए कि इससे वे भी संक्रमित हो सकते हैं। डॉ. मनमोहन वैद्य कांस्टीट्यूशन क्लब में भारत प्रकाशन की ओर से आयोजित दीपावली कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
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इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं को भी धर्म का यहीं अवधारणा स्पष्ट होगी। इसलिए लोकसभा में ”धर्म चक्र प्रवर्तनाए” अंकित है तो सुप्रीम कोर्ट का ध्येय वाक्य ”यतो धर्मः ततो जयः”। जबकि राष्ट्रीय ध्वज में धर्मचक्र है। सह सरकार्यवाह ने कहा कि सारे कोलाहल में यह स्पष्ट है कि भारत की मुख्य प्रकृति, विचार और आत्मा अध्यात्म है। भारत अपनी विशिष्ट आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान के साथ खड़ा हो रहा है। पूरा विश्व इसको महसूस कर रही है। ऐसा चाह रही है, क्योंकि यह उसके हित में है। भारत अपने इतिहास, अनुभव और विशिष्टता को विश्व को दिशा देगा। इस मौके पर भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक भारत भूषण, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर व आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, संघ दिल्ली प्रांत के प्रचार प्रमुख रीतेश अग्रवाल समेत मीडिया जगत के प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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