नई दिल्ली, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की ओर से आयोजित दोपहर के भोजन में भाग लिया। इसमें केवल ‘मोटा अनाज’ से जुड़े व्यंजन परोसे गए।
‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ को चिह्नित करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए विशेष रूप से इसे आयोजित किया गया था। दोपहर के भोजन में ज्वार, बाजरा और रागी से बने भोजन परोसे गए। इसमें रागी से बनी रोटी, इडली, डोसा प्रमुख थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोपहर के भोजन से जुड़ी तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने कहा कि हम 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में चिह्नित करने की तैयारी कर रहे हैं। संसद में एक शानदार दोपहर के भोजन में भाग लिया जहां मोटा अनाज के व्यंजन परोसे गए। विभिन्न दलों से सांसदों की भागीदारी को देखकर अच्छा लगा।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने देर शाम और सुबह जल्दी मोटा अनाज (मिलेट्स) भोज के लिए संसदीय क्षेत्र बाड़मेर से आई विशेष टीम की तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान इस केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं कृषि राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे उपस्थित रहे।
मोटा अनाज भोज की तैयारियों को लेकर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य एवं लोकसभा व राज्यसभा के सांसदगण भी बाजरे से बने विभिन्न व्यंजनों की गुणवत्ता से अवगत होंगे।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ घोषित किया गया है। मार्च 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत की ओर से पेश इससे जुड़े प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था। इस प्रस्ताव का 70 से अधिक देशों ने समर्थन किया। इसका उद्देश्य बदलती जलवायु परिस्थितियों में मोटे अनाज के पोषण और स्वास्थ्य लाभ और इसकी खेती के लिए उपयुक्तता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। मोटे अनाज या कदन्न में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी, कोदो, सावां आदि शामिल हैं।
साभार-हिस
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