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रेंट एग्रीमेंट और ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा अनिवार्य
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रेंट अथॉरिटी व स्थानीय पुलिस थाने में भी करना होगा दर्ज
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कम आय वर्ग के लिए किफायती किराये की आवास नीति लाने की तैयारी
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ओडिशा अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट-2026 के तहत किरायेदारी को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने की तैयारी
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1967 का पुराना कानून होगा समाप्त
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार शहरी आवास और किरायेदारी व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। एक ओर सरकार प्रस्तावित ओडिशा अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट-2026 के जरिए किरायेदारी को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर कम आय वर्ग के परिवारों, प्रवासी श्रमिकों और रोजगार की तलाश में शहरों में आने वाले लोगों के लिए किफायती किराये की आवास नीति (अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग पॉलिसी) भी लाने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे झुग्गी बस्तियों के विस्तार पर रोक लगाने और शहरी क्षेत्रों में बेहतर आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
प्रस्तावित ओडिशा अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट-2026 के तहत अब बिना लिखित रेंट एग्रीमेंट के मकान किराये पर नहीं दिया जा सकेगा।
60 दिन रेंट एग्रीमेंट करना होगा पंजीकरण
प्रत्येक रेंट एग्रीमेंट का हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा और इसे रेंट अथॉरिटी व स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराना होगा। इसके लिए सरकार एक डिजिटल पोर्टल भी शुरू करेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी बनेगी। नया कानून लागू होने के बाद 1967 का हाउस रेंट कंट्रोल एक्ट समाप्त हो जाएगा।
कस्बों और शहरों में किराये के घर बनाए जाएंगे
प्रस्तावित नीति के तहत, ओडिशा के विभिन्न कस्बों और शहरों में किराये के आवास प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे। सरकार की योजना अलग-अलग आवास योजनाओं के तहत रिहायशी यूनिट बनाने और उन्हें सस्ती दरों पर किराये पर उपलब्ध कराने की है। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद उन लोगों की मदद करना है जो घर खरीदने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित और उचित कीमत वाले आवास की जरूरत है।
खाली पड़े मकान किराये के नेटवर्क जुड़ेंगे
नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खाली पड़े मकानों को भी किराये के नेटवर्क से जोड़ना है। सरकार ऐसे मकानों की पहचान कर उन्हें उपयोग में लाने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करेगी, जिससे बिना बड़े पैमाने पर नए निर्माण के भी किराये के लिए अधिक आवास उपलब्ध हो सकेंगे। इससे मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शहरी क्षेत्रों में आवास की उपलब्धता बढ़ेगी।
काले धन के लेन-देन पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि भुवनेश्वर, कटक, राउरकेला सहित तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बढ़ती किराये की मांग को देखते हुए यह नई व्यवस्था काले धन के लेन-देन पर रोक लगाने, वास्तविक किरायेदारों को मनमानी बेदखली से बचाने और मकान मालिकों को कानूनी सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
झुग्गी बस्तियों के विस्तार पर लगेगी रोक
साथ ही, किफायती किराये के मकानों की उपलब्धता बढ़ने से झुग्गी बस्तियों के विस्तार पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
भारत सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर तैयारी
यह विधेयक भारत सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर तैयार किया गया है। आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी ने इस मसौदे पर आम जनता, मकान मालिकों, किरायेदारों, विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं, ताकि अंतिम कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। कहा गया है कि सरकार का लक्ष्य ऐसा आधुनिक और संतुलित किरायेदारी ढांचा तैयार करना है जो पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा दे तथा ओडिशा के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को नई दिशा प्रदान करे।
सस्ते किराये के घर मिल सकें – मंत्री
प्रस्तावित नीति के बारे में बात करते हुए आवास और शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सस्ते किराये के घर मिल सकें।
मंत्री के अनुसार, शहरी इलाकों में सस्ते घरों की कमी के कारण अनौपचारिक बस्तियों और झुग्गियों का विस्तार हुआ है। नई नीति का मकसद एक व्यवस्थित और सुलभ किराये का आवास इकोसिस्टम बनाकर इस चुनौती से निपटना है।
प्रवासी मजदूरों और शहरी निवासियों के लिए मदद
यह नीति खास तौर पर उन लोगों और परिवारों पर केंद्रित है जो रोजगार, शिक्षा और बेहतर आजीविका के अवसरों की तलाश में ग्रामीण इलाकों से शहरों में आते हैं।
कानून की प्रमुख विशेषताएं
– सभी किरायेदारी के लिए लिखित अनुबंध अनिवार्य होगा, मौखिक समझौते मान्य नहीं होंगे।
– समझौते पर हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराना होगा।
– पंजीकरण और निगरानी के लिए ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा।
– किराये की राशि तय करने या बढ़ाने में सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी।
– मकान मालिक और किरायेदार आपसी सहमति से किराया और उसकी शर्तें तय कर सकेंगे।
– विधेयक भारत सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर तैयार
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