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सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर घटने लगा
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जाजपुर, मयूरभंज और बालेश्वर अब भी प्रभावित
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राज्य में सिर्फ सुवर्णरेखा नदी खतरे के निशान से ऊपर
भुवनेश्वर। ओडिशा में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर अब सामान्यतः घटने की प्रवृत्ति में है, जबकि बारिश की गतिविधियों में भी काफी कमी आई है। राज्य सरकार जिला प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव तथा पुनर्बहाली के कार्य जारी हैं।
राज्य सरकार के अनुसार फिलहाल जाजपुर, मयूरभंज और बालेश्वर जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। जाजपुर के दशरथपुर प्रखंड में 19 ग्राम पंचायतों के 62 गांव प्रभावित हैं। यहां 22 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 7,745 लोगों को आश्रय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मयूरभंज में 21 प्रखंड, 53 ग्राम पंचायतों और 97 गांवों के अलावा बारीपदा नगरपालिका के दो वार्ड प्रभावित हैं। जिले में 29 राहत शिविर चल रहे हैं, जहां 10,501 लोगों को सहायता दी जा रही है। बाढ़ से 104 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है, जबकि नौ पॉलीथिन रोल वितरित किए गए हैं।
बालेश्वर में भोगराई, बालियापाल, बस्ता, रेमुणा और जलेश्वर समेत पांच प्रखंड प्रभावित हैं। इन प्रखंडों की 41 ग्राम पंचायतों के 214 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। जिले में 72 राहत शिविर संचालित हैं, जिनमें 35,740 लोगों को आश्रय दिया गया है।
47 बचाव दल तैनात
प्रभावित जिलों में राहत और बचाव दलों की तैनाती जारी है। आज कुल 47 दल तैनात किए गए हैं, जिनमें ओड्राफ के 21, एनडीआरएफ के चार और अग्निशमन एवं आपात सेवा के 22 दल शामिल हैं।
जाजपुर में ओड्राफ के तीन दल तैनात हैं। मयूरभंज में ओड्राफ के छह और अग्निशमन एवं आपात सेवा के 13 दल काम कर रहे हैं। वहीं बालेश्वर में ओड्राफ के 12, एनडीआरएफ के चार और अग्निशमन एवं आपात सेवा के नौ दल राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।
सिर्फ सुवर्णरेखा खतरे के निशान से ऊपर
राज्य की अधिकांश प्रमुख नदियों का जलस्तर अब घट रहा है। फिलहाल सुवर्णरेखा ही ऐसी नदी है, जो खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। दोपहर 12 बजे राजघाट में सुवर्णरेखा का जलस्तर 10.84 मीटर दर्ज किया गया और इसमें भी गिरावट का रुझान बना हुआ है।
सुबह के आंकड़ों के अनुसार नरज में महानदी, सुंदरगढ़ में इब, पनपोश में ब्राह्मणी, आनंदपुर और अखुआपाड़ा में बैतरणी, एनएच-5 पर बूढ़ाबलंगा, गुनुपुर में वंशधारा तथा मथानी में जालका नदी के जलस्तर में भी गिरावट दर्ज की गई है।
हीराकुद जलाशय में 4 गेट खुले
हीराकुद जलाशय का जलस्तर 627.29 फीट दर्ज किया गया। जलाशय में 1,41,962 क्यूसेक पानी का प्रवाह हो रहा है, जबकि 78,429 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। फिलहाल चार गेट खुले हैं।
आठ जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का येलो अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना स्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तरी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकता है।
बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, केंदुझर और मयूरभंज में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इन जिलों के लिए येलो चेतावनी जारी की गई है।
प्रशासन ने लोगों से गरज-चमक के दौरान सतर्क रहने और बिजली गिरने से बचाव के लिए सुरक्षित स्थान पर शरण लेने की अपील की है।
स्थानीय बाढ़ और जलभराव पर प्रशासन की नजर
जिला प्रशासन को निचले इलाकों में स्थानीय बाढ़ और जलभराव, अंडरपास बंद होने, सड़कों और कमजोर ढांचों को संभावित नुकसान तथा भारी बारिश या बाढ़ के कारण बागवानी फसलों और खड़ी फसलों को होने वाले नुकसान को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है।
प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल होने तक राहत और सहायता कार्य जारी रहेंगे। संबंधित जिलों से प्राप्त मांग के आधार पर सभी बाढ़ प्रभावित जिलों में पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
24 घंटे स्थिति पर नजर
विशेष राहत आयुक्त कार्यालय के तहत राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र सभी जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों के साथ समन्वय करते हुए 24 घंटे स्थिति की निगरानी कर रहा है।
नदियों के जलस्तर में गिरावट और बारिश की गतिविधियों में कमी को राहत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों तक बिना देरी सहायता पहुंचाने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी, समन्वित मैदानी कार्रवाई तथा राहत और पुनर्बहाली उपाय जारी रखने की बात कही है।
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