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ओडिशा में फिर बाढ़ का खतरा

  •     सुवर्णरेखा और बैतरणी खतरे के निशान से ऊपर

  •     गालूडीह बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा सुवर्णरेखा का जलस्तर

  •   बालेश्वर और जाजपुर में बिगड़े हालात

  •     कई गांव जलमग्न; जाजपुर में 65 स्कूल बंद

भुवनेश्वर। ओडिशा में एक बार फिर बाढ़ का संकट गहरा गया है। सुवर्णरेखा और बैतरणी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बालेश्वर और जाजपुर जिलों में बाढ़ का पानी गांवों और सड़कों में घुस गया है, जिससे हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत एवं बचाव दलों को तैनात किया है।

झारखंड के गालूडीह बैराज के 13 गेटों से 5,039 क्यूसेक पानी छोड़े जाने और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। राजघाट में नदी का चेतावनी स्तर 9.45 मीटर और खतरे का निशान 10.36 मीटर है। बुधवार सुबह 7 बजे यहां जलस्तर 11.54 मीटर दर्ज किया गया।

इस मौसम में सुवर्णरेखा में यह तीसरी बाढ़ है। जलस्तर बढ़ने से बालेश्वर जिले के जलेश्वर, भोगराई, बस्ता और बालियापाल प्रखंडों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

पांच फीट तक पानी में डूबी सड़कें

सुवर्णरेखा का पानी बालियापाल, जलेश्वर और भोगराई प्रखंडों के कई गांवों में घुस गया है। कई स्थानों पर सड़कों के ऊपर करीब पांच फीट तक पानी बहने से आवागमन बाधित हो गया है। कई गांवों का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया है और लोगों को जरूरी सामान लाने-ले जाने में भी परेशानी हो रही है।

जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख दिलीप कुमार राउत ने बताया कि सुवर्णरेखा का जलस्तर गुरुवार शाम तक खतरे के निशान से ऊपर रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल राज्य की किसी अन्य प्रमुख नदी में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है।

बैतरणी में उफान, जाजपुर में सड़कें क्षतिग्रस्त

जाजपुर जिले में बैतरणी नदी के उफान से स्थिति गंभीर हो गई है। नदी के पानी के दबाव से कई स्थानों पर तटबंध और सड़कें प्रभावित हुई हैं। दोबाविल पताना और तारपदा पंचायत के कांटापाड़ा में कटाव के साथ जयंतरा महापात्र साही के पास भी नुकसान की सूचना है।

बैतरणी नदी अखुआपाड़ा में 18.33 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। लगातार बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी आने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा है।

दशरथपुर में 65 स्कूल बंद

बाढ़ और जलभराव को देखते हुए जाजपुर जिले के दशरथपुर प्रखंड में बुधवार को 65 स्कूलों को बंद कर दिया गया। जिला शिक्षा कार्यालय ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक की कक्षाएं स्थगित करने का आदेश दिया है।

हालांकि जरूरत पड़ने पर इन्हीं स्कूल भवनों का इस्तेमाल बचाव और राहत कार्यों के लिए किया जा सकेगा। बैतरणी के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रखंड की 19 ग्राम पंचायतों के करीब 60 गांव प्रभावित हुए हैं।

एक महीने से पढ़ाई प्रभावित, परीक्षा को लेकर चिंता

बाढ़ प्रभावित पंचायतों के कई बच्चों की पढ़ाई लंबे समय से प्रभावित है। कुछ इलाकों में बच्चे एक महीने से अधिक समय से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। कई स्कूल भवन और संपर्क मार्ग पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ के पानी से किताबें और पढ़ाई की सामग्री भी खराब होने की खबर है।

कई परिवार छतों, तटबंधों और राहत केंद्रों में रहने को मजबूर हैं। अभिभावकों ने मैट्रिक परीक्षा नजदीक होने को देखते हुए सरकार से वैकल्पिक पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि बाढ़ के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर और असर न पड़े।

मयूरभंज में राहत के संकेत

उधर, मयूरभंज जिले में स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। बूढ़ाबलंग नदी का जलस्तर अब घटने लगा है। इससे राहत केंद्रों में रह रहे कुछ विस्थापित परिवारों के घर लौटने का रास्ता साफ हुआ है। महानदी बेसिन में भी बारिश कम होने के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

प्रशासन ने उत्तरी ओडिशा के प्रभावित जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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