भुवनेश्वर: जनजातीय छात्रों के बीच वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी समझ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ओडिशा के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के पांच मेधावी कक्षा 10 के छात्रों ने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान के सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग में दो दिवसीय सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्टेम पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभाशाली एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय छात्रों को सेमीकंडक्टर तकनीक, उन्नत अनुसंधान सुविधाओं, क्लीनरूम संचालन तथा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के उभरते करियर अवसरों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।
कार्यक्रम में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय गिधिबास के प्रबीन कुमार नायक और गीतांजलि महांत, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, बहलदा के दुस्मंत माझी तथा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय ढांघेरा के हीरामणि बास्की और फुलामणि सिंह ने हिस्सा लिया। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय गिधिबास की शिक्षिका देबास्मिता प्रियदर्शिनी बेहरा ने एस्कॉर्ट शिक्षिका के रूप में छात्रों के साथ भाग लिया।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को सेमीकंडक्टर तकनीक, वेफर प्रोसेसिंग, संदूषण नियंत्रण और क्लीनरूम सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी गई। उन्होंने ऑप्टिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों एवं अनुसंधान अवसंरचना की कार्यप्रणाली को समझा।
छात्रों को सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रियाओं, सटीक विनिर्माण तकनीकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी भी दी गई। सत्रों में भारत की तकनीकी प्रगति और तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सेमीकंडक्टर के रणनीतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित करियर मार्गदर्शन एवं काउंसलिंग सत्र में छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया गया तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और अनुसंधान के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागी छात्रों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों में से एक भारतीय विज्ञान संस्थान में मिली इस प्रत्यक्ष सीख से छात्रों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और सेमीकंडक्टर, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा उन्नत अनुसंधान जैसे उभरते क्षेत्रों में करियर के लिए प्रेरित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह पहल जनजातीय छात्रों को अत्याधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ने और उनके लिए नए शैक्षणिक एवं करियर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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