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दिलीप राय बने निर्णायक विजेता
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निर्वाचित सदस्यों को मिला प्रमाणपत्र
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भाजपा को 3 सीटों के साथ बड़ी बढ़त
भुवनेश्वर। ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद नाटकीय घटनाक्रम के बीच निर्वाचित सदस्यों को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कड़े मुकाबले में दिलीप राय ने चौथी सीट पर जीत दर्ज कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
147 सदस्यीय विधानसभा में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हुआ, जिसमें सभी विधायकों ने भाग लिया। कुल चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (प्राथमिकता आधारित) प्रणाली लागू थी, जिसमें जीत के लिए 2,941 वोट वैल्यू (लगभग 30 विधायकों के समर्थन के बराबर) जरूरी थी।
पहली वरीयता में तीन उम्मीदवार पार
पहली वरीयता के मतों में मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को 35-35 वोट (3500 अंक) मिले और वे आसानी से निर्वाचित हो गए। वहीं संतृप्त मिश्र ने 31 वोट (3100 अंक) हासिल कर सीट पक्की की।
चौथी सीट पर रोमांचक मुकाबला
चौथी सीट के लिए मुकाबला दिलीप राय और डा दत्तेश्वर होता के बीच था, जिनके पास शुरुआती दौर में 2300-2300 अंक थे। इसके बाद दूसरी वरीयता के वोटों का ट्रांसफर निर्णायक साबित हुआ।
सुजीत कुमार के अतिरिक्त मतों से दिलीप राय को 559 अंक मिले, जिससे उनका स्कोर 2859 पहुंचा। बाद में मनमोहन सामल के अतिरिक्त वोट भी उन्हें मिले। अंतिम गणना में दिलीप राय 3418 अंकों के साथ कोटा पार कर गए, जबकि डॉ होता 2300 अंकों पर ही रह गए।
भाजपा को बड़ा राजनीतिक लाभ
इस जीत के साथ भाजपा ने चार में से तीन सीटें जीतकर मजबूत बढ़त हासिल की। दो सीटें सीधे भाजपा उम्मीदवारों ने जीतीं, जबकि एक सीट भाजपा समर्थित निर्दलीय के रूप में दिलीप राय को मिली। चुनाव के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी विजयी उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र सौंपे। करीब 12 साल बाद हुए इस कड़े राज्यसभा चुनाव ने ओडिशा की राजनीति में जबरदस्त हलचल और रणनीतिक चालों को उजागर कर दिया।
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