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नंडाबाड़ी जंगल में डेढ़ घंटे चली थी गोलीबारी
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सुरक्षा बलों का सघन सर्च अभियान जारी
कंधमाल। ओडिशा माओवादी मुक्त होने के लक्ष्य की ओर एक और कदम बढ़ाता दिख रहा है। कंधमाल जिले के नंडाबाड़ी जंगल क्षेत्र में रविवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए हैं। इसके बाद सोमवार को भी जंगल में सघन तलाशी अभियान जारी रहा।
सूत्रों के अनुसार, करड़ा जंगल में माओवादी दल के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद रविवार को संयुक्त अभियान चलाया गया। माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक गोलीबारी हुई थी। मुठभेड़ के दौरान कई माओवादियों के घायल होने की भी खबर थी, जबकि कुछ जंगल के भीतर भागने में सफल रहे।
मारे गए दो माओवादियों के शव बरामद कर फुलबाणी पुलिस मुख्यालय लाया गया। उनकी पहचान योगेश और रत्ना के रूप में हुई है, जो छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
संगठन में अहम भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, योगेश सीपीआई (माओवादी) के केकेबीएन डिवीजन का एरिया कमेटी सदस्य था, जबकि रत्ना संगठन का सक्रिय सदस्य था। योगेश को शुक्रू का करीबी सहयोगी भी बताया जा रहा है।
वरिष्ठ नेता की तलाश तेज
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि माओवादी राज्य कमेटी सदस्य शुक्रू भी इसी जंगल में छिपा हो सकता है। इसी इनपुट के आधार पर विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने पूरे जंगल क्षेत्र को घेरकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि शुक्रू मारा जाता है या आत्मसमर्पण करता है तो बीजीएन डिवीजन के वांछित माओवादी नाकुल और अन्वेष समेत अन्य सदस्य भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
सीमा पार गतिविधियों पर नजर
जानकारी के अनुसार, ओडिशा के अधिकांश माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के कुछ माओवादी कंधमाल क्षेत्र में सक्रिय बताए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बढ़ते अभियानों के चलते माओवादी ओडिशा में शरण लेने की कोशिश कर सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान जारी है और क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
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