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प्राचीन कलिंग स्थापत्य को मिलेगा नया जीवन
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सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को बढ़ावा
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 3000 से अधिक विरासत एवं स्मारक स्थलों के पुनरुद्धार की घोषणा की है। यह पहल प्राचीन कलिंग स्थापत्य शैली के संरक्षण और राज्य की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विरासत अध्ययन केंद्र की स्थापना
सरकार ऐतिहासिक स्मारकों के प्रलेखन और संरक्षण के लिए एक विशेष विरासत अध्ययन केंद्र की स्थापना करेगी। यह केंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से स्मारकों की वास्तु विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व का सटीक अभिलेखीकरण करेगा। इस पहल से संरक्षण कार्य को योजनाबद्ध, प्रमाणिक और दीर्घकालिक बनाया जाएगा।
वैज्ञानिक संरक्षण के लिए विशेषज्ञों का सहयोग
इस परियोजना में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के विशेषज्ञ भी समझौता ज्ञापन के माध्यम से जुड़ेंगे। वे संरचनात्मक सुरक्षा की वैज्ञानिक जांच करेंगे तथा संरक्षण की उपयुक्त रणनीति तैयार करने में मार्गदर्शन देंगे। इस सहयोग से पुनरुद्धार कार्य अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनने की उम्मीद है।
विशेष प्राथमिकता वाले प्रमुख मंदिरों पर विशेष ध्यान
– मुक्तेश्वर मंदिर – 10वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर कलिंग स्थापत्य की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
– कोणार्क सूर्य मंदिर – विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त यह मंदिर अपनी जटिल शिल्पकला और स्थापत्य वैभव के लिए वैश्विक पहचान रखता है।
– लिंगराज मंदिर – भुवनेश्वर का यह प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल राज्य की आस्था और परंपरा का प्रतीक है।
सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक सशक्तिकरण
इस व्यापक पुनरुद्धार कार्यक्रम से ओडिशा की सांस्कृतिक गरिमा को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और सांस्कृतिक शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे।
विरासत स्थलों की सुरक्षा के माध्यम से राज्य अपनी ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है।
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