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माओवाद विरोधी अभियान तेज, सुरक्षा बलों ने बढ़ाई कार्रवाई
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देश को माओवाद मुक्त बनाने की मुहिम को मिली रफ्तार
भुवनेश्वर। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि निरंतर दबाव, प्रभावी सुरक्षा कार्रवाई और आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की नीति के चलते इस महीने के अंत तक कंधमाल को भी माओवाद मुक्त जिला घोषित किया जा सकता है।
देश को माओवाद मुक्त बनाने की समय-सीमा नजदीक आने के साथ ही राष्ट्रव्यापी माओवाद विरोधी अभियान ने गति पकड़ ली है। इसी क्रम में ओडिशा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को बड़े स्तर पर तेज किया गया है, जिसके चलते बीते कुछ महीनों में माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कंधमाल अब भी सुरक्षा बलों के रडार पर
हालांकि हालात में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, इसके बावजूद कंधमाल जिला अभी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, जिले के घने जंगलों में अब भी कई माओवादी नेता सक्रिय बताए जा रहे हैं। क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए सतत सर्च ऑपरेशन और आत्मसमर्पण की अपील एक साथ जारी है।
कंधमाल में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को मिली नई धार
दक्षिणी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक नीति शेखर ने बताया कि सुरक्षा बलों को स्पष्ट लक्ष्य दिए गए हैं और उसी रणनीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमें लक्ष्य दिया गया है और हम उसी के अनुरूप काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि लगातार की गई कार्रवाई का सकारात्मक असर दिखा है और बौध जिला अब माओवाद मुक्त घोषित किया जा चुका है।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी सक्रिय
आईजी ने बताया कि रायगड़ा में आत्मसमर्पण करने वाला माओवादी निखिल और उसके सहयोगी पहले कंधमाल में भी सक्रिय थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि माओवादी गतिविधियां जिलों की सीमाओं से परे फैली हुई थीं।
अब भी 30 से 40 माओवादी सक्रिय: पुलिस
पुलिस के आकलन के अनुसार, कंधमाल जिले में फिलहाल 30 से 40 माओवादी कैडर सक्रिय हैं। इस क्षेत्र में पहले बंसधारा-घुमुसर-नागाबली (बीजीएन) और कलाहांडी-कंधमाल-बौध-नयागढ़ (केकेबीएन) दो माओवादी डिवीजन सक्रिय थे। बीजीएन डिवीजन के कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि केकेबीएन डिवीजन से जुड़े करीब 30 कैडर अब भी सक्रिय बताए जा रहे हैं।
आत्मसमर्पण की अपील जारी, अभियान तेज
अधिकारियों ने कहा कि शेष सभी माओवादी कैडरों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की जा रही है। इसके साथ ही कंधमाल के वन क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान लगातार जारी हैं।
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