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उपनिषद ज्ञानामृत प्रवचन श्रृंखला के द्वितीय दिवस मानव वन की दुर्लभता और उद्देश्य पर डाला प्रकाश
भुवनेश्वर। “उपनिषद ज्ञानामृत” प्रवचन श्रृंखला के द्वितीय दिवस जगद्गुरु श्रीकृपालु महाराज की प्रमुख प्रचारिका रासेश्वरी रासेश्वरी देवी ने मानव वन की अद्वितीय महत्ता और उसके वास्तविक उद्देश्य पर गहन एवं प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने मानव शरीर को भगवत् प्राप्ति का दुर्लभ साधन बताते हुए कहा कि यही वह एकमात्र योनि है जिसमें विवेक और कर्म-स्वतंत्रता दोनों उपलब्ध हैं।
रासेश्वरी देवी ने स्पष्ट किया कि केवल मनुष्य ही ‘कर्मयोनि’ के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें अपने कर्मों के माध्यम से भाग्य निर्माण की स्वतंत्रता प्राप्त है। यही कारण है कि मानव देह आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि अन्य योनियों की तुलना में मनुष्य के पास सही-गलत के भेद की क्षमता और साधना का मार्ग चुनने का विवेक होता है।
हालांकि, रासेश्वरी देवी ने मानव शरीर की नश्वरता की ओर भी साधकों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह अमूल्य देह क्षणभंगुर है और वन अत्यंत अनिश्चित। मृत्यु कभी भी आ सकती है, इसलिए साधना और आध्यात्मिक प्रयासों को भविष्य पर टालना घोर भूल है। उन्होंने आग्रह किया कि वन की अस्थिरता को समझते हुए प्रत्येक क्षण का सदुपयोग किया जाए, क्योंकि एक बार हाथ से निकल जाने पर यह दुर्लभ मानव जन्म पुनः सहजता से प्राप्त नहीं होता।
अपने प्रवचन में रासेश्वरी देवी ने यह भी प्रतिपादित किया कि मनुष्य के सभी कर्मों के मूल में एक ही सार्वभौमिक उद्देश्य निहित है—आनंद की प्राप्ति। भले ही लक्ष्य भिन्न-भिन्न प्रतीत हों, लेकिन प्रत्येक प्रयास के पीछे सुख की कामना छिपी होती है। उन्होंने कहा कि वात्मा उस आनंद की खोज में है जो नित्य हो, निरंतर बढ़ता रहे और जिस पर कभी दुख का आधिपत्य न हो। ऐसा अनंत आनंद केवल ईश्वर की प्राप्ति से ही संभव है और सच्ची बुद्धिमत्ता अपने विचारों, कर्मों और प्रयासों को इसी परम लक्ष्य की ओर केंद्रित करने में है।
उल्लेखनीय है कि “उपनिषद ज्ञानामृत” प्रवचन श्रृंखला 9 फरवरी तक प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से 8:30 बजे तक मेलण ग्राउंड, लक्ष्मीसागर, भुवनेश्वर में आयोजित की जा रही है। यह श्रृंखला साधकों को उपनिषदों के शाश्वत ज्ञान से जुड़ने और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान कर रही है।
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