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तनातनी के बीच महानदी बचाओ आंदोलन ने किया स्पष्ट
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छत्तीसगढ़ के कलमा बैराज दौरे को लेकर राजस्व मंत्री की सलाह पर संगठन की स्पष्ट प्रतिक्रिया
भुवनेश्वर। महानदी जल विवाद को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच जारी तनातनी के बीच महानदी बचाओ आंदोलन (एमबीए) ने स्पष्ट किया है कि उसका छत्तीसगढ़ के कलमा बैराज का दौरा किसी प्रकार के टकराव या “युद्ध” की मंशा से नहीं है। संगठन ने यह प्रतिक्रिया ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी की उस सलाह के बाद दी है, जिसमें उन्होंने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद के समाधान के लिए संवैधानिक मंचों और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने की बात कही थी।
मंत्री की सलाह का स्वागत, सहयोग का भरोसा
महानदी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुदर्शन दास ने कहा कि संगठन मंत्री की सलाह का स्वागत करता है और इस मुद्दे पर सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि हम मंत्री द्वारा महानदी जल मुद्दे पर हमारी भावनाओं को समझने और सम्मान देने के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।
महानदी दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी
सुदर्शन दास ने कहा कि महानदी ओडिशा और छत्तीसगढ़ को सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से जोड़ती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन कभी भी दोनों राज्यों के लोगों के बीच रिश्तों को कमजोर नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि हम दोनों राज्यों के बीच मौजूद रिश्तों का सम्मान करते हैं। उन्हें नुकसान पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं है। इसलिए छत्तीसगढ़ के खिलाफ युद्ध की बात ही नहीं उठती।
पिछले दस वर्षों से कानून के दायरे में संघर्ष
एमबीए संयोजक ने कहा कि संगठन अपने गठन के बाद से पिछले दस वर्षों में हमेशा कानून के दायरे में रहकर कार्य करता रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि न तो कोई गैरकानूनी कदम उठाया जाएगा और न ही ऐसा कोई कार्य किया जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के लोगों के बीच कटुता पैदा हो।
कलमा बैराज दौरा केवल प्रतीकात्मक विरोध
सुदर्शन दास ने स्पष्ट किया कि कलमा बैराज का दौरा केवल प्रतीकात्मक विरोध है। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में कलमा बैराज के पास बनाया गया रेत का बांध अवैध है और इस मुद्दे को लेकर संगठन ने बार-बार ओडिशा सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
कई स्तरों पर भेजी गई शिकायतें, नहीं मिला जवाब
उन्होंने बताया कि जब इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रेत बांध हटाने की मांग की गई। इस पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, ओडिशा के मुख्यमंत्री, महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और ओडिशा के उपमुख्यमंत्री को भी भेजी गई हैं।
दास ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि अब तक किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। इस मुद्दे पर चर्चा करने में भी कोई रुचि नहीं दिखाई गई, जिससे हम गहराई से आहत हैं।
बैराज को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं
एमबीए ने स्पष्ट किया कि संगठन कलमा बैराज को तोड़ने या किसी से लड़ने नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी केवल अवैध रूप से बनाए गए रेत बांध के खिलाफ विरोध करेंगे और प्रतीकात्मक रूप से उसे हटाने का प्रयास करेंगे।
रचनात्मक समाधान के हर प्रयास का समर्थन
सुदर्शन दास ने कहा कि महानदी बचाओ आंदोलन महानदी जल विवाद के समाधान के लिए किए जाने वाले हर यथार्थवादी और रचनात्मक प्रयास का समर्थन करेगा।
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