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तकनीकी शिक्षा से रोजगार तक की खाई पाटने के लिए उदैती फाउंडेशन के साथ सरकार की साझेदारी
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहीं बेटियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने उदैती फाउंडेशन के सहयोग से सुदक्ष्य योजना के अंतर्गत एक डायग्नोस्टिक अध्ययन और रोजगार पायलट परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और वास्तविक रोजगार के बीच मौजूद अंतर को दूर करना है।
कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा (एसडीटीई) विभाग ने 27 जनवरी 2026 को इस पहल के लिए उदैती फाउंडेशन को सहयोग प्रदान करने संबंधी निर्देश जारी किए। सुदक्ष्य योजना की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी, जिसके बाद आईटीआई, पॉलिटेक्निक और व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में छात्राओं का नामांकन उल्लेखनीय रूप से बढ़ा।
हालांकि, प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बहुत कम संख्या में महिलाएं औपचारिक रोजगार तक पहुंच पाईं, जिससे प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के बीच की खामियां सामने आईं।
छह महीने का विस्तृत अध्ययन
उदैती फाउंडेशन दिसंबर 2025 से मई 2026 तक छह महीने का डायग्नोस्टिक अध्ययन करेगा। इस अध्ययन में नामांकन की प्रवृत्ति, प्रशिक्षण के दौरान रुकावटें, रोजगार की स्थिति, प्रणालीगत चुनौतियां जैसे बिंदुओं का विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए शोधकर्ता शिक्षण संस्थानों का दौरा करेंगे, छात्राओं, प्रशिक्षकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे तथा संस्थागत आंकड़ों की समीक्षा कर ठोस और प्रमाण-आधारित सुझाव तैयार करेंगे।
फ्लेक्सी-स्टाफिंग मॉडल से रोजगार पायलट
अध्ययन के साथ-साथ महिलाओं के लिए एक रोजगार पायलट परियोजना भी शुरू की जाएगी। इसमें फ्लेक्सी-स्टाफिंग मॉडल अपनाया जाएगा, जिसके तहत महिलाएं स्टाफिंग कंपनियों द्वारा औपचारिक रूप से नियुक्त की जाएंगी और विभिन्न संस्थानों में तैनात होंगी।
इस मॉडल के माध्यम से महिलाओं को भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा, सवेतन अवकाश जैसी वैधानिक सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उन्हें अनौपचारिक से औपचारिक रोजगार की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।
सरकार और फाउंडेशन की जिम्मेदारी
राज्य सरकार इस पहल के लिए संस्थानों और आवश्यक आंकड़ों तक पहुंच सुनिश्चित करेगी, जबकि अध्ययन और पायलट परियोजना से जुड़ा पूरा खर्च उदैती फाउंडेशन वहन करेगा। इस पूरी पहल का समन्वय उदैती फाउंडेशन की कार्यक्रम सहयोगी रुचिका मोहंती करेंगी। सरकार का मानना है कि यह पहल तकनीकी रूप से प्रशिक्षित महिलाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के नए रास्ते खोलेगी।
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