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तीन दिवसीय दौरे में कोलकाता निवेशक सम्मेलन में होंगे शामिल
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उद्योग जगत के दिग्गजों से करेंगे मुलाकात
भुवनेश्वर। ओडिशा के औद्योगिकीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी तीन दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल रवाना होंगे। इस दौरे के दौरान वे विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित निवेशक सम्मेलन में भाग लेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री अपने दौरे के दौरान शुक्रवार को कोलकाता में होने वाले निवेशक सम्मेलन में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी निवेशक सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ देश के प्रमुख कॉरपोरेट नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य ओडिशा में निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करना और राज्य में औद्योगिक विकास को गति देना है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री विभिन्न क्षेत्रों में संभावित निवेश और रोजगार सृजन पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा करेंगे।
उद्योग मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहेंगे साथ
तीन दिवसीय इस दौरे में मुख्यमंत्री के साथ उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं तथा उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। पूरी टीम का फोकस राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर रहेगा।
हैदराबाद निवेशक सम्मेलन की सफलता के बाद दूसरा बड़ा प्रयास
औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को तेज करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री एक महीने के भीतर दूसरी बार निवेशक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पहले 19 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने हैदराबाद में आयोजित ओडिशा निवेशक सम्मेलन में भाग लिया था, जिसे बड़ी सफलता मिली थी। उस दो दिवसीय सम्मेलन में ओडिशा को 67 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनसे लगभग 56 हजार रोजगार सृजन की संभावना जताई गई थी।
13 एमओयू पर हस्ताक्षर, हजारों नौकरियों की उम्मीद
हैदराबाद सम्मेलन के दौरान कुल 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिनका निवेश संभावित मूल्य 27,650 करोड़ रुपये रहा और इससे लगभग 15,905 नौकरियों के सृजन का अनुमान लगाया गया। इसके अतिरिक्त 39,131 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए थे, जिनसे 40 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना अधिकारियों ने जताई थी।
फार्मा और एयरोस्पेस क्षेत्रों पर विशेष फोकस
हैदराबाद रोड शो के दौरान 38 उच्चस्तरीय एकल बैठकें और दो क्षेत्र-विशेष गोलमेज बैठकें आयोजित की गई थीं। इनमें औषधि उद्योग तथा एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया। औषधि क्षेत्र की बैठक में आठ प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए, जबकि एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र की बैठक में 27 कंपनियों ने भाग लिया। इससे इन क्षेत्रों में ओडिशा की बढ़ती रणनीतिक भूमिका स्पष्ट हुई।
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