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ओडिशा में छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा

  •     शैक्षणिक संस्थानों पर करोड़ों की हेराफेरी का आरोप

  •     फर्जी प्रमाणपत्र और ‘घोस्ट स्टूडेंट्स’ से निकाली गई राशि

  •     कैग की समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य

भुवनेश्वर। ओडिशा में छात्रवृत्ति के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की समीक्षा में सामने आया है कि राज्य के कई शैक्षणिक संस्थानों ने छात्रवृत्ति राशि की आड़ में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी की है। इस खुलासे ने छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में छात्रों के फर्जी जाति और आय प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर अवैध रूप से छात्रवृत्ति की राशि निकाली गई। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में ऐसे ‘घोस्ट स्टूडेंट्स’ के नाम पर भी छात्रवृत्ति ली गई, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था।

इंजीनियरिंग कॉलेजों और अधिकारियों में संलिप्तता

कैग की समीक्षा में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले में कुछ सरकारी अधिकारियों और विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध रही है। आरोप है कि पात्र छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति की राशि को आपसी मिलीभगत से गलत तरीके से निकाल लिया गया।

प्रेरणा पोर्टल के आंकड़ों में भारी गड़बड़ी

रिपोर्ट के अनुसार, प्रेरणा पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और वास्तव में छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों की सूची में कोई समुचित तालमेल नहीं पाया गया। कई मामलों में लाभार्थियों के नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं थे या फिर सूची से मेल नहीं खाते थे।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1.38 करोड़ रुपये का भुगतान

कैग ऑडिट में यह भी खुलासा हुआ कि फर्जी जाति और आय प्रमाणपत्र जमा करने वाले छात्रों को 1.38 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि का भुगतान कर दिया गया। कैग रिपोर्ट संख्या-3 में इन फर्जी लाभार्थियों की पहचान होने के बावजूद अब तक राज्य कोष में इस राशि की वसूली नहीं हो सकी है।

अवैध बैंक खातों में 7.40 करोड़ रुपये स्थानांतरित

एक अन्य गंभीर चूक के तहत बिना समुचित दस्तावेजी सत्यापन के 7.40 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि अवैध बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी गई। कैग ने इसे छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली में बड़ी लापरवाही बताया है।

2017 से 2020 के ऑडिट में सामने आई अनियमितताएं

ये सभी अनियमितताएं वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान किए गए कैग ऑडिट में उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में छात्रवृत्ति वितरण व्यवस्था में निगरानी, जवाबदेही और नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

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