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स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किया
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया
भुवनेश्वर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में ओडिशा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में कक्षा पांचवीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए मार्च 2026 से वार्षिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए परीक्षा मार्च के पहले सप्ताह में कराने का फैसला किया है।
स्वतः प्रमोशन व्यवस्था में बदलाव
यह निर्णय वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने के बाद चली आ रही नो-डिटेंशन नीति के तहत स्वतः प्रमोशन व्यवस्था से बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट किए जाने की व्यवस्था थी, जिसे अब संशोधित किया गया है।
आरटीई नियमों में संशोधन
ओडिशा सरकार ने जुलाई 2025 में आरटीई नियमों में आधिकारिक संशोधन करते हुए कक्षा पांचवीं से आठवीं तक फेल और सुधार (रीमेडिएशन) व्यवस्था को फिर से लागू किया है। यह बदलाव एनईपी की उस सोच के अनुरूप है, जिसमें स्कूली शिक्षा के प्रमुख चरणों पर संरचित मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।
प्रत्येक विषय की परीक्षा 50 अंकों की होगी
नई गाइडलाइंस के अनुसार, प्रत्येक विषय की परीक्षा 50 अंकों की होगी। प्रश्नपत्र में 60 प्रतिशत वर्णनात्मक प्रश्न होंगे, जो छात्रों की समझ और विषय ज्ञान का परीक्षण करेंगे, जबकि 40 प्रतिशत वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे, जो याद्दाश्त और मूलभूत समझ पर आधारित होंगे।
कमजोर छात्रों के लिए सुधार का अवसर
नई परीक्षा प्रणाली की एक अहम विशेषता दूसरा मौका और सुधार कार्यक्रम है। जिन विद्यार्थियों को कुल मिलाकर 30 प्रतिशत से कम अंक मिलेंगे, उन्हें 4 से 6 सप्ताह के विशेष सुधार कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके बाद वे अप्रैल 2026 के तीसरे सप्ताह में पूरक परीक्षा में शामिल होंगे। यदि पुनः परीक्षा में भी विद्यार्थी प्रमोशन की पात्रता हासिल नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में दोहराना होगा।
शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर
योग्यता आधारित इस मूल्यांकन प्रणाली को लागू कर ओडिशा सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थी वास्तव में अगली कक्षा के लिए शैक्षणिक रूप से तैयार हों। इस पहल के साथ ओडिशा, एनईपी के तहत संरचित मूल्यांकन प्रणाली को अपनाने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल हो गया है, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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