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सकारात्मक सोच और पारिवारिक मूल्यों पर मामस भुवनेश्वर की अनूठी पहल

  •     सास-बहू संगीत अंत्याक्षरी से सजी पारिवारिक एकता

  •     तेरापंथ भवन में दिखा उल्लास और संस्कारों का संगम

भुवनेश्वर। मारवाड़ी महिला समिति भुवनेश्वर (मामस) ने सकारात्मक सोच और पारिवारिक मूल्यों को केंद्र में रखते हुए एक सराहनीय सांस्कृतिक आयोजन किया। कटक रोड स्थित तेरापंथ भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के तहत सास-बहू संगीत अंत्याक्षरी प्रतियोगिता ने पूरे वातावरण को आनंद, सौहार्द और उत्साह से भर दिया।

सास-बहू की मधुर जुगलबंदी बनी आकर्षण का केंद्र

इस विशेष प्रतियोगिता में बुजुर्ग मारवाड़ी महिलाओं ने अपनी बहुओं के साथ मिलकर हिंदी फिल्मी गीतों की अंत्याक्षरी में भाग लिया। पीढ़ियों के बीच इस मधुर तालमेल ने यह संदेश दिया कि परिवार में संवाद, सम्मान और प्रेम से हर रिश्ता और भी मजबूत बनता है। गीतों के माध्यम से सास-बहू के रिश्ते की सकारात्मक और प्रेरक तस्वीर सामने आई।

महिला सहभागिता और आत्मीयता का सुंदर उदाहरण

कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां न केवल मनोरंजन का साधन होती हैं, बल्कि आपसी जुड़ाव और सामूहिक खुशी का भी माध्यम बनती हैं। पूरे आयोजन के दौरान हंसी, तालियों और उत्साह का माहौल बना रहा।

जूही अग्रवाल के नेतृत्व में उपलब्धियों भरा कार्यकाल

मामस भुवनेश्वर की अध्यक्षा जूही अग्रवाल का कार्यकाल संगठनात्मक मजबूती और रचनात्मक गतिविधियों के लिए यादगार रहा। हाल ही में आयोजित प्रांतीय सम्मेलन में ओडिशा की 99 शाखाओं में से मामस भुवनेश्वर को सर्वश्रेष्ठ शाखा और जूही अग्रवाल को सर्वश्रेष्ठ अध्यक्षा का सम्मान मिलना इसी का प्रमाण है।

कार्यकाल के अंतिम दिन बना उत्सव का माहौल

जूही अग्रवाल के कार्यकाल के अंतिम दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम भावनात्मक होने के साथ-साथ उत्सवपूर्ण भी रहा। सभी सदस्यों ने पूरे मन से भाग लेकर उनके नेतृत्व की सराहना की और स्मृतियों को संजोया।

विजेताओं का सम्मान, सौहार्दपूर्ण समापन

प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक अल्पाहार के साथ हुआ, जहां सभी ने आपसी संवाद और आत्मीयता के साथ समय बिताया।

समाज को सकारात्मक संदेश

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश भी था कि परिवार की मजबूती, महिला सहभागिता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से समाज और अधिक सशक्त बनता है। मामस भुवनेश्वर की यह पहल निश्चित ही अन्य सामाजिक संगठनों के लिए प्रेरणास्रोत है।

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