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कलिंग साहित्य महोत्सव बना विचार, संवाद और संस्कृति का महाकुंभ
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साहित्य को विभाजन नहीं, एकता की शक्ति बताया गया
भुवनेश्वर। 12वें कलिंग साहित्य महोत्सव (केएलएफ) 2026 का भव्य शुभारंभ भुवनेश्वर के मेफेयर कन्वेंशन में हुआ। चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन ने साहित्य, कला, संस्कृति, लोकतंत्र और वैश्विक संवाद को एक मंच पर लाकर भुवनेश्वर को दक्षिण एशिया के प्रमुख बौद्धिक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित किया। यह महोत्सव भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और ओडिशा सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
साहित्य जोड़ता है, तोड़ता नहीं : उपमुख्यमंत्री
महोत्सव का उद्घाटन करते हुए उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि साहित्य विभाजन नहीं, बल्कि एकता का माध्यम है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की ऐतिहासिक चेतना न्याय, गरिमा और संवाद पर आधारित रही है। ऐसे समय में जब समाज ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रहा है, साहित्य संवाद, संवेदनशीलता और सुनने की संस्कृति को मजबूत करता है।
उन्होंने केएलएफ की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच ओडिशा के सभी 30 जिलों सहित देश-विदेश के लेखकों को एक साथ लाता है।
ओडिशा बने भारत की बौद्धिक राजधानी : संस्कृति मंत्री
ओडिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि ओडिशा वह भूमि है, जहां तलवार ने चेतना के आगे सिर झुकाया। समाज केवल इमारतों से नहीं, चेतना से बनता है और साहित्य उसका संरक्षक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लाखों दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर रही है और लेखकों के लिए नई फैलोशिप शुरू की जा रही हैं। उन्होंने 2036 तक ओडिशा को भारत की बौद्धिक राजधानी बनाने का विजन साझा किया।
लोकतंत्र की आत्मा है साहित्य
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि साहित्य आत्मा का शिल्पकार है। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में भी साहित्य ही मानवता, करुणा और आशा का सच्चा संवाहक है। वहीं श्रीलंका के मंत्री डॉ उपाली पन्निलागे ने भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि कलिंग केवल भूगोल नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यतागत विचार है।
पुरस्कार, पुस्तक विमोचन और विशिष्ट अतिथि
उद्घाटन सत्र में कई प्रतिष्ठित पुस्तकों का विमोचन हुआ, जिनमें ‘मेड इन नेपाल’ और ‘सामंत चंद्रशेखर पत्रावली’ शामिल हैं। इस अवसर पर कलिंग अंतरराष्ट्रीय लिविंग लीजेंड पुरस्कार, कलिंग साहित्य पुरस्कार, युवा लेखक पुरस्कार सहित कई सम्मान प्रदान किए गए। प्रसिद्ध लेखिका और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित डॉ. प्रतिभा राय ने कहा कि साहित्य समाज की अंतरात्मा है और युवा लेखकों को मंच देना इसकी जीवंतता को बनाए रखता है।
दूसरे दिन विचार, पहचान और कल्पना केंद्र में
महोत्सव के दूसरे दिन साहित्य ने पुस्तकों की सीमाओं को पार करते हुए लोकतंत्र, नारी विमर्श, विज्ञान, सिनेमा, स्मृति और समाज से संवाद किया। केएलएफ के संस्थापक एवं निदेशक रश्मि रंजन परिडा ने कहा कि साहित्य केवल पन्नों में नहीं, बल्कि समाज के हर संघर्ष और बदलाव में जीवित रहता है।
अनुवाद, लोकतंत्र, सिनेमा और विज्ञान पर मंथन
दूसरे दिन अनुवाद की भूमिका, स्त्री लेखन, भारतीय लोकतंत्र, संविधान और संसद पर गंभीर संवाद हुए। राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने संसद और संविधान पर विशेष सत्र में भाग लिया। विज्ञान को कथा के रूप में देखने पर प्रो बेदंगदास मोहंती, जबकि सिनेमा और ओटीटी पर सुधीर मिश्रा, भवाना सोमाया सहित कई चर्चित हस्तियों ने विचार रखे।
कविता, कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शाम
दक्षिण एशियाई कवियों की प्रस्तुतियां, आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विशेष सत्र, तथा ओड़िया सिनेमा के भविष्य पर चर्चाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। शाम का समापन कलिंग आर्ट फेस्टिवल के अंतर्गत मर्दला वादन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
11 जनवरी तक चलेगा साहित्य का उत्सव
“सीमाओं से परे साहित्य” की अवधारणा पर आधारित कलिंग साहित्य महोत्सव 2026 11 जनवरी तक जारी रहेगा। यह आयोजन लेखकों, विचारकों, कलाकारों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देते हुए ओडिशा की वैश्विक बौद्धिक पहचान को और मजबूत कर रहा है।
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