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ओडिशा में एस्मा के बावजूद नहीं थमा डॉक्टरों का आंदोलन

  •     राज्यभर में दो घंटे की ओपीडी हड़ताल जारी

  •     सरकार ने छह महीने के लिए लागू किया एस्मा

  •     ओएमएसए ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जारी रखा विरोध

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार द्वारा आवश्यक सेवाएं (रखरखाव) अधिनियम, 1988 यानी एस्मा लागू किए जाने के बावजूद राज्य में डॉक्टरों का आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है। बुधवार को ओडिशा मेडिकल सर्विसेज़ एसोसिएशन (एस्मा) के आह्वान पर राज्यभर के सरकारी डॉक्टरों ने सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो घंटे के लिए बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाएं निलंबित रखीं।

इस ओपीडी बहिष्कार के चलते सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों से आए मरीज, जो नियमित इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं, सबसे अधिक प्रभावित हुए।

मंगलवार को लागू हुआ था एस्मा

गौरतलब है कि डॉक्टरों के आंदोलन को रोकने और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने मंगलवार को एस्मा लागू किया था। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह आदेश छह महीने तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत डॉक्टरों सहित स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को हड़ताल, कार्य बहिष्कार या सेवाएं ठप करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनहित में आवश्यक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किन सेवाओं पर लागू है एस्मा

अधिसूचना के मुताबिक एस्मा जिला मुख्यालय अस्पताल, उप-मंडलीय अस्पताल, क्षेत्रीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नगर पालिका अस्पताल, सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त स्वायत्त स्वास्थ्य संस्थान, एएचआरसीसी, क्षेत्रीय स्पाइनल इंजरी केंद्र, जेल अस्पताल, पुलिस अस्पताल सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर लागू है। इसमें डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग अधिकारी, फार्मेसी अधिकारी, पैरामेडिक्स, तकनीशियन, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और संविदा कर्मी भी शामिल हैं।

आपात सेवाएं चालू, नियमित ओपीडी प्रभावित

हालांकि एस्मा के प्रावधानों के तहत आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहीं, लेकिन नियमित ओपीडी सेवाएं दो घंटे तक बाधित रहीं। इससे अस्पताल परिसरों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।

ओएमएसए का साफ संदेश-आंदोलन जारी रहेगा

ओएमएसए ने सरकार की सख्ती के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि उनकी 10 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है। ओएमएसए नेताओं के अनुसार, राज्य में जहां लगभग 14 हजार डॉक्टरों की आवश्यकता है, वहीं केवल करीब 6 हजार डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

सरकार पर दमनकारी रवैये का आरोप

ओएमएसए के राज्य अध्यक्ष डॉ किशोर मिश्र ने कहा कि संगठन ने प्रतीकात्मक रूप से केवल एक से दो घंटे के लिए ओपीडी सेवाएं निलंबित कीं और उसके बाद मरीजों का इलाज किया गया। उनका आरोप है कि सरकार का रवैया दमनकारी है और इसमें अनावश्यक नौकरशाही हस्तक्षेप दिखाई देता है।

सरकार का सख्त रुख

वहीं सरकार का कहना है कि जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं सर्वोपरि हैं और किसी भी हाल में इन्हें बाधित नहीं होने दिया जाएगा। एस्मा लागू होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। एस्मा लागू होने और डॉक्टरों के आंदोलन जारी रहने के बीच अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और चिकित्सक संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होगा।

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