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ओडिशा, बिहार, झारखंड को बताया हिस्सा
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भारत की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
भुवनेश्वर/नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में कूटनीतिक और सुरक्षा चिंताओं को लेकर एक नया संकट उभर रहा है। तुर्की समर्थित एक इस्लामी संगठन ‘सल्तनत-ए-बंग्ला’ द्वारा बांग्लादेश में जारी एक विवादास्पद नक्शे ने भारत के भीतर खलबली मचा दी है। इस नक्शे में ओडिशा, बिहार, झारखंड, पूरा पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार के अराकान राज्य को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के हिस्से के रूप में दर्शाया गया है।
नक्शा कहां और कैसे सामने आया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नक्शा बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया, जिनमें ढाका विश्वविद्यालय का शिक्षक-छात्र केंद्र भी शामिल है। अप्रैल में आयोजित पॉयेला बोइशाख (बांग्ला नववर्ष) के उत्सव के दौरान यह नक्शा प्रदर्शित किया गया था।
एक वायरल फोटो में एक युवक इस नक्शे के सामने खड़ा नजर आ रहा है, जिसमें ‘सल्तनत-ए-बंग्ला’ नामक संगठन द्वारा भारत के कई राज्यों को बांग्लादेश के भविष्य के विस्तारवादी एजेंडे का हिस्सा दिखाया गया है।
कौन है सल्तनत-ए-बंग्ला संगठन
यह संगठन ढाका में सक्रिय तुर्की एनजीओ द्वारा समर्थित एक कट्टरपंथी इस्लामी समूह बताया जा रहा है। इस संगठन को तुर्की की सत्तारूढ़ एकेपी पार्टी और पाकिस्तान के साथ मिलकर बांग्लादेश में इस्लामी एजेंडा फैलाने वाले नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है।
तुर्की का बढ़ता प्रभाव और पाकिस्तान की भूमिका
विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की ने बांग्लादेश में वही रणनीति अपनाई है जो उसने पहले पाकिस्तान में अपनाई थी— सैन्य सहयोग, धार्मिक शिक्षा के जरिए कट्टरपंथ को बढ़ावा और एनजीओ के माध्यम से जनमत निर्माण।
पाकिस्तान, जो पहले ही भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इस नए तुर्की-बांग्लादेश गठजोड़ को पीछे से समर्थन दे रहा है। यह त्रिपक्षीय समीकरण (तुर्की-बांग्लादेश-पाकिस्तान) भारत की आंतरिक सुरक्षा और कूटनीतिक हितों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रभाव
पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पहले से ही तनाव है। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले और कट्टरपंथियों को खुला समर्थन इस तनाव को और गहरा कर रहे हैं।
भारत ने हाल ही में बांग्लादेश से होने वाले 770 मिलियन डॉलर (लगभग 6400 करोड़ रुपये) के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, जो कुल आयात का 42% है। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास का संकेत माना जा रहा है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
इस विवादास्पद नक्शे और तुर्की-पाकिस्तान के समर्थन से सक्रिय समूहों की गतिविधियों को देखते हुए भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। ओडिशा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में साइबर निगरानी और सामुदायिक खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।
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