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ओडिशा में सांख्यिकीय व्यवस्था होगी मजबूत

  •     राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार होंगे विकास के आंकड़े

  •     मुख्य सचिव अनु गर्ग ने की पहली राज्यस्तरीय समन्वय समिति की बैठक

  •     सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी और सरकारी आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर

  •    सभी विभागों में नामित होंगे डेटा अधिकारी

भुवनेश्वर। ओडिशा में विकास योजनाओं की बेहतर निगरानी, सरकारी आंकड़ों की गुणवत्ता और सांख्यिकीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में बुधवार को लोक सेवा भवन में पहली राज्यस्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच सांख्यिकीय आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण और आदान-प्रदान की व्यवस्था को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और ओडिशा सरकार के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। इसके तहत राष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप राज्य की आंकड़ा संग्रहण प्रणाली को विकसित करने तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्रगति का प्रभावी आकलन करने पर जोर दिया गया।

बैठक में विकास आयुक्त सह अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह, विभिन्न विभागों के सचिव, एमओएसपीआई के उप महानिदेशक तथा वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी शामिल हुए।

सर्वेक्षण और आंकड़ा संग्रहण प्रणाली का होगा आधुनिकीकरण

बैठक में आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशक ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस), सांख्यिकीय गुणवत्ता आश्वासन ढांचे (एसक्यूएएफ) और कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार प्रणाली (कैपी) के क्रियान्वयन की जानकारी दी। इस तकनीक के माध्यम से मूल्य संबंधी आंकड़ों और जिला स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाएगा।

इसके अलावा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी), जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक आंकड़ों में एकरूपता लाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

सभी विभागों में नामित होंगे डेटा अधिकारी

बैठक में सांख्यिकीय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके तहत राज्य के सभी विभागों में अलग-अलग डेटा अधिकारी नामित किए जाएंगे, जो आंकड़ों के संग्रहण और विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की जिम्मेदारी संभालेंगे।

सचिव स्तर की बैठकों में सांख्यिकीय गतिविधियों और सर्वेक्षणों की प्रगति को नियमित एजेंडे में शामिल किया जाएगा। जिला स्तर पर इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिलाधीशों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

सर्वेक्षण से पहले और बाद में होंगी परामर्श कार्यशालाएं

सरकार प्रमुख सांख्यिकीय सर्वेक्षण शुरू करने से पहले और उनकी रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद संबंधित हितधारकों के साथ परामर्श कार्यशालाएं आयोजित करेगी। इसका उद्देश्य सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता, आंकड़ों की सटीकता और उनके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ाना है।

इस पहल से राज्य में विकास योजनाओं के लिए अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध होने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ने और सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति का बेहतर मूल्यांकन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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