-
एसीएस अरविंद पाढ़ी ने कलेक्टरों को दिए निर्देश
-
प्रस्तावों की जिला स्तर पर पूरी जांच और समय पर कार्रवाई अनिवार्य
भुवनेश्वर। ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधूरी फाइलों और न्यायिक मामलों में अंतिम समय पर कागजात भेजने की कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखाई है। विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि सचिवालय को ऐसे प्रस्ताव और फाइलें न भेजी जाएं, जिनमें जरूरी दस्तावेज, तथ्य और अधिकारियों की स्पष्ट राय उपलब्ध न हो।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर ही प्रत्येक मामले की पूरी जांच और समीक्षा की जानी चाहिए। प्रस्ताव, स्पष्टीकरण अथवा न्यायालय से जुड़े मामलों को समय पर तैयार कर विभाग को भेजना होगा। यदि विभागीय कार्य में देरी के कारण कोई कानूनी या प्रशासनिक समस्या उत्पन्न होती है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रस्ताव में पूरी जानकारी और कलेक्टर की राय जरूरी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब प्रत्येक प्रस्ताव में मामले की पूरी पृष्ठभूमि, संबंधित कानून एवं नियम, उन प्रावधानों का स्पष्ट विश्लेषण तथा कलेक्टर या सक्षम अधिकारी की राय और अनुशंसा शामिल होनी चाहिए।
केवल किसी समस्या या मामले को सचिवालय भेज देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। जिला स्तर पर मामले का परीक्षण करने के बाद यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित अधिकारी के अनुसार मामले में क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
विभाग का कहना है कि अधूरी फाइलें आने के बाद सचिवालय को बार-बार स्पष्टीकरण और अतिरिक्त दस्तावेज मांगने पड़ते हैं। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया लंबी होती है और कई मामलों में अनावश्यक रूप से कई सप्ताह निकल जाते हैं।
न्यायालय के मामलों में अंतिम समय की कार्रवाई पर रोक
एसीएस ने न्यायिक मामलों को लेकर विशेष रूप से सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायालय के आदेश, वैधानिक समय-सीमा और अवमानना से जुड़े मामलों को पर्याप्त समय रहते विभाग के पास भेजना होगा। अंतिम समय में कागजात भेजने की व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी।
उड़ीसा हाईकोर्ट में रिट अपील और सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) से जुड़े मामलों में कलेक्टरों को विधि विभाग के निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में देरी महज कागजी लापरवाही नहीं है, बल्कि इससे गंभीर कानूनी स्थिति पैदा हो सकती है।
नियम स्पष्ट हों तो भुवनेश्वर भेजने की जरूरत नहीं
एसीएस ने जिला स्तर पर अनावश्यक रूप से मामलों को विभाग के पास भेजकर स्पष्टीकरण मांगने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने को कहा है। यदि किसी मामले में सरकार के नियम और दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं तो कलेक्टर स्तर पर ही उनका अध्ययन कर तर्कसंगत निर्णय लिया जाना चाहिए।
इसका उद्देश्य यह है कि स्पष्ट नियमों वाले मामलों में केवल स्पष्टीकरण के इंतजार में फाइलें लंबित न रहें और जिला प्रशासन अपने अधिकार क्षेत्र में समय पर निर्णय ले सके।
जिला स्तर पर बनेगी फाइलों की जांच व्यवस्था
सभी पत्राचार विभाग के आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। आपात स्थिति में भी संबंधित मामले के सभी आवश्यक दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखना अनिवार्य होगा।
कलेक्टरों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में एक विशेष व्यवस्था स्थापित करें, जिसके तहत विभाग को भेजे जाने वाले प्रस्तावों की जिला स्तर पर जांच की जाए। इन प्रस्तावों की नियमित समीक्षा भी की जाए, ताकि कोई अधूरी फाइल कलेक्टर कार्यालय से बाहर न जाए।
देरी से कानूनी या प्रशासनिक समस्या हुई तो होगी कार्रवाई
राजस्व विभाग ने अपने निर्देश में जिम्मेदारी भी तय कर दी है। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही से अधूरा या विलंबित प्रस्ताव भेजा जाता है और उसके कारण कानूनी अथवा प्रशासनिक समस्या उत्पन्न होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व, भूमि प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और बड़ी संख्या में न्यायिक मामलों की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग में यह निर्देश फाइलों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग का स्पष्ट संदेश है—पूरे तथ्य, स्पष्ट अनुशंसा और समय पर कार्रवाई के बिना कोई फाइल आगे नहीं बढ़ेगी।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
