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गिड़ीपबल्ली भूस्खलन में दबे 10 लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद कमजोर

  •     प्रभावित परिवारों ने उनके प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू

  •     मौसम खराब होने से बुधवार को रोका गया बचाव अभियान

  •     मंत्री सुरेश पुजारी के निर्देश पर तलाश जारी रखने की तैयारी

  •     30 फीट से अधिक गहराई में दबे हैं लापता 10 लोग

भुवनेश्वर। गंजाम और कंधमाल जिले की सीमा पर स्थित गिड़ीपबल्ली गांव में हुए भीषण भूस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश को लेकर स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। लगातार पांच दिनों तक चले बहु-एजेंसी बचाव अभियान के बावजूद अब तक केवल दो शव बरामद किए जा सके हैं। खराब मौसम और पहाड़ी क्षेत्र में दोबारा भूस्खलन की आशंका के कारण बुधवार को बचाव अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इस बीच मलबे में दबे अपने परिजनों के जीवित मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ने के बाद प्रभावित परिवारों ने उनके प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है।

हालांकि, राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने जिला प्रशासन को तलाश और बचाव अभियान जारी रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लापता लोगों का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। प्रशासन भी मौसम और स्थल की परिस्थितियों का आकलन कर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

30 फीट से अधिक मलबे में दबे होने की आशंका

कंधमाल के जिलाधिकारी ने बताया कि एक ही रात में पहाड़ी बस्ती में लगातार तीन भूस्खलन हुए थे। विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, मलबे की गहराई 30 फीट से अधिक है। भारी चट्टानों, मिट्टी और कीचड़ की कई परतों के कारण खुदाई करना बेहद कठिन हो गया है। इसके अलावा नियंत्रित विस्फोट से दोबारा भूस्खलन होने का खतरा भी बना हुआ है, जिससे बचावकर्मियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी वेदभूषण ने बताया कि बचाव अभियान को रोकने का फैसला पूरी तरह से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कोई अंतिम फैसला नहीं है। हम लापता लोगों को खोजने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। अगर मौसम ठीक होता है, तो गुरुवार से बचाव कार्य फिर से शुरू किया जा सकता है।

अब तक बरामद दो शवों की पहचान

अब तक बरामद दो शवों की पहचान 29 वर्षीय सनमान (सलमान) प्रधान और 52 वर्षीय रबी मल्लिक के रूप में हुई है। दोनों शव मलबे की ऊपरी परतों में मिले थे और उन्हें बाहर निकालने में भी करीब तीन दिन का समय लगा। इसके बाद लगातार विस्फोट और खुदाई के बावजूद कोई बड़ी सफलता नहीं मिली।

परिवारों की सहमति से अंतिम संस्कार की इच्छा जताई

कंधमाल के जिलाधिकारी ने बताया कि लापता लोगों के परिवारों ने अब इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार कर लिया है और वे प्रशासन के सावधानी बरतने वाले फैसले से सहमत हैं। गांव के पास एक जगह पर सभी का सामूहिक अंतिम संस्कार करने का एक प्रस्ताव है और ग्रामीणों ने वहां एक स्मारक बनाने का सुझाव भी दिया है। कंधमाल और गंजाम जिला प्रशासन की आज हुई एक संयुक्त बैठक में यह तय हुआ कि परिवारों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इन मामलों पर आगे बातचीत करके ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

गंजाम और कंधमाल जिला प्रशासन के अधिकारियों ने राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। गंजाम के जिलाधिकारी वी. कीर्ति वासन ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में बारिश और नए भूस्खलन की आशंका को देखते हुए अभियान रोकने का निर्णय लिया गया है। मौसम अनुकूल होने पर बचाव कार्य दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।

आगे के बचाव कार्यों में अब रेलवे की टीम शामिल नहीं होगी। विशेषज्ञों ने हेलीकॉप्टर के जरिए बचाव कर्मियों और उपकरणों को वहां उतारने (एयर-ड्रॉप करने) की योजना को भी खारिज कर दिया है, क्योंकि वहां का इलाका बहुत कठिन है और हेलीकॉप्टर उतारने के लिए कोई उपयुक्त जगह नहीं है।

विशेष उपकरणों से भी नहीं मिली सफलता

बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ), अग्निशमन सेवा, रेलवे और अन्य विभागों की टीमें लगाई गई थीं। जीवन का संकेत देने वाली मशीनों, खोजी कुत्तों, आईआईटी विशेषज्ञों और भारी मशीनों की मदद ली गई। मलबा हटाने के लिए नियंत्रित विस्फोट और चट्टानों को खींचकर हटाने की तकनीक भी अपनाई गई, लेकिन भारी चट्टानों और अस्थिर जमीन ने अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।

जोखिम वाले पहाड़ी गांवों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की योजना

इस त्रासदी के बाद राज्य सरकार ने भूस्खलन की आशंका वाले पहाड़ी और तलहटी के गांवों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की व्यापक योजना तैयार करने की पहल की है। मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, कंधमाल और गजपति सहित संवेदनशील जिलों में जोखिम वाले गांवों की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों में अपनाए गए आपदा प्रबंधन के तरीकों का भी अध्ययन किया गया है। गिड़ीपबली के प्रभावित परिवारों ने भी सुरक्षित स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है। सरकार ने उन्हें पुनर्वास और आवास उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

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