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नंदनकानन में पांच ओरंगुटान शिशुओं की हालत स्थिर

  •  विशेषज्ञ समिति ने आहार बढ़ाने और ठोस भोजन शुरू करने की दी सलाह

भुवनेश्वर। ओडिशा के नंदनकानन प्राणि उद्यान के क्वारंटीन केंद्र में रखे गए पांच बचाए गए ओरंगुटान शिशुओं की स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल स्थिर है। चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार, सभी शिशु सामान्य रूप से भोजन स्वीकार कर रहे हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
नंदनकानन प्राणि उद्यान के उपनिदेशक प्रदीप मिरासे की ओर से जारी स्वास्थ्य मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, पांचों ओरंगुटान शिशुओं में तीन नर और दो मादा हैं। सभी की व्यापक चिकित्सकीय जांच की गई, जिसमें थर्मल कैमरे से शरीर के तापमान की जांच भी शामिल रही।
तीन नर और दो मादा ओरंगुटान की हुई जांच
जांच में तीन नर शिशुओं का वजन क्रमश: 5.34 किलोग्राम, 3.56 किलोग्राम और 3.10 किलोग्राम पाया गया। उनका शरीर का तापमान 98.6 से 101 डिग्री फारेनहाइट के बीच दर्ज किया गया। वहीं, दोनों मादा शिशुओं का वजन 4.28 किलोग्राम और 2.18 किलोग्राम रहा तथा उनका तापमान क्रमश: 98.8 और 99.3 डिग्री फारेनहाइट दर्ज किया गया। चिकित्सकीय निरीक्षण में सभी पांचों की स्थिति स्थिर पाई गई और उनके भोजन ग्रहण करने का तरीका सामान्य बताया गया।
पांचों शिशुओं की विशेष निगरानी और उपचार संबंधी दिशा-निर्देश देने के लिए विशेषज्ञों की एक तकनीकी समिति ने क्वारंटीन परिसर का दौरा किया। समिति में दिल्ली चिड़ियाघर के पशु चिकित्सा अधिकारी अभिजीत भवाळ और देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के वन्यजीव पशु चिकित्सक सनत कृष्ण मुलिया शामिल थे।
विशेषज्ञों ने पशु चिकित्सा दल को सलाह दी कि शिशुओं को दिए जाने वाले दैनिक आहार की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाए और उनके भोजन में ठोस आहार शामिल किया जाए। साथ ही, शरीर में मौजूद आंतरिक परजीवियों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए आइवरमेक्टिन या डोरामेक्टिन जैसी परजीवीरोधी दवाओं के इस्तेमाल की भी सलाह दी गई है।
9 सितंबर को बालासोर में मिले थे पांचों शिशु
पांचों ओरंगुटान शिशु 9 सितंबर की सुबह बालासोर वन प्रमंडल के भोगराई प्रखंड के बड़पाली गांव के पास पाए गए थे। एक साथ पांच ओरंगुटान के इस इलाके में मिलने के बाद वन विभाग ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की कि वे वहां कैसे पहुंचे।
वन अधिकारियों के साथ पशु चिकित्सकों और जीवविज्ञानियों ने पांचों की जांच की है। विभाग ने नंदनकानन के वैज्ञानिकों और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों के साथ भी समन्वय किया है। लगभग एक वर्ष आयु के इन पांचों शिशुओं को फिलहाल नंदनकानन के विशेष क्वारंटीन परिसर में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य स्थिति, भोजन और व्यवहार पर लगातार निगरानी की जा रही है।
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