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आठ राज्यों में एसटीएफ की छापेमारी
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वन मंत्री बोले- विदेशी कनेक्शन के पुख्ता संकेत
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नंदनकानन में पांचों शावकों का इलाज जारी
भुवनेश्वर। बालेश्वर जिले के भोगराई इलाके में पांच शिशु ओरंगुटान मिलने के मामले ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क की आशंका को गहरा कर दिया है। 8 सितंबर को कैसुआरिना के जंगल में मिले ये पांचों ओरंगुटान अब नंदनकानन प्राणी उद्यान में विशेषज्ञों की निगरानी में हैं। ओडिशा के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा है कि जांच में विदेशी कनेक्शन सामने आया है और इनके पीछे सक्रिय नेटवर्क का पता लगाने के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने आठ राज्यों में जांच और छापेमारी शुरू की है।
मंत्री के अनुसार, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) भी जांच में एसटीएफ के साथ समन्वय कर रहा है। जांच दल ओडिशा से बाहर भी भेजे गए हैं और शुरुआती स्तर पर कुछ संदिग्ध लोगों की पहचान की गई है। हालांकि, इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने और मुख्य संचालक की पहचान करने में समय लग सकता है।
मंत्री ने कहा कि गिरोह को पूरी तरह पकड़ने में एक महीने से अधिक समय भी लग सकता है, लेकिन जांच तेज कर दी गई है और दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य केवल इस मामले में शामिल लोगों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को तोड़ना है, जिसके जरिए ओडिशा को विदेशी वन्यजीवों की तस्करी के लिए ट्रांजिट या ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
ब्लैक एसयूवी, सीसीटीवी और समुद्री रास्तों की भी जांच
जांच एजेंसियां भोगराई में बचाव अभियान से एक रात पहले देखी गई काली एसयूवी, ओडिशा-पश्चिम बंगाल सीमा के सीसीटीवी फुटेज और संभावित समुद्री तथा पूर्वोत्तर के जमीनी मार्गों की जांच कर रही हैं। जांच में दीघा के एक होटल का नाम भी संभावित ट्रांजिट प्वाइंट के तौर पर सामने आया है। हालांकि, इन सुरागों से अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।
ओरंगुटान गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल हैं और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार के नियमों के तहत इन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्राप्त है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत करीब 20 से 25 लाख रुपये तक बताई गई है। इसी वजह से इनके संरक्षण के साथ-साथ तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नंदनकानन में पांचों शावक स्थिर, एक में गंभीर एनीमिया
उधर, नंदनकानन प्राणी उद्यान में पांचों शिशु ओरंगुटान की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है। विशेषज्ञों की तकनीकी समिति उनकी रोजाना निगरानी कर रही है। जांच में एक शावक में गंभीर एनीमिया, जबकि दो में हल्का एनीमिया पाया गया है। बाकी दो की रिपोर्ट का इंतजार है।
शावकों के छाती, पेट और सिर के एक्स-रे किए गए हैं। संक्रमण समेत अन्य संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की जांच के लिए रक्त, सीरम और नासोफैरिंजियल स्वैब के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं। उन्हें आयरन सप्लीमेंट के साथ फल भी दिए जा रहे हैं।
ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ के पूर्व परियोजना समन्वयक इंद्रमणि नाथ के अनुसार, शावकों को मां का दूध नहीं मिलने के कारण पोषण संबंधी समस्या हो सकती है। तस्करों द्वारा उन्हें बोतल से दूध पिलाया गया होगा, जो प्राकृतिक पालन-पोषण का विकल्प नहीं है। उन्होंने पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
डीएनए जांच से खुलेगा उत्पत्ति का राज
पांचों ओरंगुटान की डीएनए जांच भी महत्वपूर्ण होगी। इससे उनकी उत्पत्ति और भविष्य में उन्हें इंडोनेशिया या मलेशिया वापस भेजे जाने से संबंधित दावों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल नंदनकानन इन शावकों के लिए उपचार और संरक्षण केंद्र दोनों की भूमिका निभा रहा है। वन विभाग और विशेषज्ञ समिति उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है। वहीं जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्होंने इन दुर्लभ वन्यजीवों को दक्षिण-पूर्व एशिया से कथित तौर पर तस्करी के जरिए भारत तक पहुंचाया और फिर उन्हें बालेश्वर के जंगल में छोड़ दिया।
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